Last Updated:July 03, 2025, 18:53 ISTआजकल अधिकतर भक्त अपने बाल गोपाल जी को बच्चे की तरह मानते हैं, उन्हें अपने साथ हर जगह ले जाते हैं — यात्रा पर, बाजार में, यहां तक कि बिना स्नान किए भी साथ रखते हैं. लेकिन यह भाव, भक्ति में बाल स्वरूप की भावना तो ठीक है, मगर मर्यादा और शुद्धता का पालन भी उतना ही जरूरी है. स्वामी प्रेमानंद महाराज के अनुसार ठाकुर जी को ठाकुर जी ही रहने दीजिए, क्योंकि वो भगवान हैं.
भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने से साधक की हर एक मनोकामना पूर्ण हो जाती है और जीवन में खुशिय़ां बनी रहती है. आज के समय में अधिकतर घरों में बाल गोपाल विराजित है. जिनकी सेवा अपने बच्चे की भांति करते हैं. इतना ही नहीं घर से बाहर निकलते ही उन्हें लेकर निकलते हैं. यात्रा से लेकर बाजार तक में उन्हें साथ लेकर चलते हैं, जिससे वह घर में अकेले न रहें. ऐसे ही वृंदावन के केलिकुंज स्थान पर स्वामी प्रेमानंद महाराज के सत्संग में एक छोटी बच्ची से सवाल किया गया कि लोग अपने साथ लड्डू गोपाल को लेकर यात्रा करते हैं. फिर वे बिना स्नान किए उन्हें ऐसे ही साथ रखते हैं. ऐसे में आप बताएं कि क्या बिना स्नान किए ठाकुर जी की सेवा करना सही है? प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. ठाकुर जी को ठाकुर जी रहने दीजिए. भले ठाकुर जी के प्रति बाल भाव हो, लेकिन वो भगवान हैं. इसलिए कभी भी अपवित्र होकर उन्हें नहीं छूना चाहिए. उन्हें भगवान की तरह सम्मान देना चाहिए. पवित्र होकर ही उनका स्पर्श करना चाहिए और सेवा करनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि उन्हें बस यूं ही साथ लेकर घूमते रहें. उनका साथ होना, उनकी उपस्थिति है — इसलिए उनके प्रति आदर, शुद्धता और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है.homeuttar-pradeshठाकुर जी हैं भगवान, न करें सेवा में ये लापरवाही, जानें प्रेमानंद महाराज की राय
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