Last Updated:December 29, 2025, 08:00 ISTLucknow News: उत्तर प्रदेश में नशीले कफ सिरप तस्करी मामले में जौनपुर के पूर्व समाजवादी पार्टी के विधायक का नाम भी सामने आया है. ईडी जांच में वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली है. जिसके बाद अब ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है. ख़बरें फटाफटकफ सिरप तस्करी कांड में सपा का कनेक्शन.लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है. इस बड़े सिंडिकेट की जांच के दौरान जौनपुर के एक पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक का नाम सामने आया है, जिसके फर्जी दस्तावेजों पर आधारित दवा फर्मों के खातों से वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, सिंडिकेट के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के साथ जुड़े बर्खास्त पुलिसकर्मी आलोक सिंह और अमित सिंह उर्फ अमित टाटा से पूछताछ के दौरान यह कनेक्शन उजागर हुआ. इन फर्मों के माध्यम से फर्जी बिलिंग और जाली लाइसेंस के जरिए लाखों बोतलों की कोडीन-युक्त कफ सिरप की आपूर्ति की गई, जिसका इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में होता था. यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लेकर पड़ोसी राज्यों और बांग्लादेश तक फैला हुआ था.
जल्द जारी हो सकता है नोटिस
ईडी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक के नाम से जुड़े कुछ लेन-देन की जांच चल रही है. आशंका जताई जा रही है कि सिंडिकेट को फंडिंग या सप्लाई चेन में सहयोग के बदले रकम का लेन-देन हुआ हो सकता है. हालांकि, अभी तक पूर्व विधायक के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं लगा है, लेकिन जांच को और मजबूत करने के बाद ईडी जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है.
फंडिंग की हो रही जांच
ईडी की टीम ने हाल ही में लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए. सिंडिकेट के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को शेल कंपनियों, हवाला और बेनामी संपत्तियों के माध्यम से सफेद करने का प्रयास किया गया. आलोक सिंह की लखनऊ में आलीशान कोठी और अन्य संपत्तियों की जांच से भी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने की कोशिश जारी है.
100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ और फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफएसडीए) द्वारा दर्ज दर्जनों मुकदमों पर आधारित है, जिसमें कुल 100 करोड़ से अधिक कीमत की जब्ती हुई है. सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा फर्जी फर्म खोलकर वैध सप्लाई दिखाने का खेल चला, जबकि असल में दवाएं नशे के बाजार में पहुंचाई जाती थीं. ईडी अब आलोक सिंह और अमित टाटा से पूर्व विधायक के संबंधों और संभावित वित्तीय सहयोग के बारे में विस्तृत पूछताछ करेगी. जांच एजेंसी का कहना है कि सबूतों को और पुख्ता करने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा. यह मामला राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है, जहां सत्ताधारी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं.About the AuthorAmit Tiwariवरिष्ठ संवाददाताअमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ेंLocation :Lucknow,Uttar PradeshFirst Published :December 29, 2025, 08:00 ISThomeuttar-pradeshकफ सिरप सिंडिकेट: सपा के पूर्व विधायक का भी कनेक्शन, ED जांच में मिले सबूत

