Uttar Pradesh

कीमत महंगी और डिमांड तगड़ी, इस पत्ते की खेती से बाराबंकी का किसान करता है अच्छी कमाई

बाराबंकी: किसानों की कमाई ज्यादा हो इसके लिए उन फसलों की खेती पर जोर दिया जा रहा है जिनकी मार्केट डिमांड काफी ज्यादा रहती है. इन फसलों से ज्यादा मुनाफा मिलता है. इससे किसानों को अपनी मेहनत का वाजिब दाम मिलता है. आज हम आपको एक ऐसी ही फसल के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी बाजार में काफी डिमांड रहती है और इसकी अच्छी कीमत भी रहती है. तो हम आपको बताने जा रहे हैं सलाद के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले लेटस के बारे में.लेटस दिखने में तो एक पत्ता होता है लेकिन ये काफी ज्यादा पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होता है. लेटस एक विदेशी फसल है. बड़े होटलों में इसकी अच्छी डिमांड देखने को मिलती है. ये खाने में काफी स्वादिष्ट होता है. इसकी कई वैरायटी होती हैं. आमतौर पर यह लाल और हरे रंग का पत्ता होता है. इनकी खेती से किसान काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं.जिले के एक प्रगतिशील किसान इस सलाद पत्ता की खेती करते हैं. उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा हो रहा है. वह कई सालों से इस सलाद पत्ते की खेती कर रहे हैं. बाराबंकी जिले के पिपरहां गांव के रहने वाले किसान अशोक कुमार ने पारंपरिक फसलों के साथ सलाद पत्ता के खेती की शुरुआत की. इसमे उन्हें फायदा देखने को मिला. आज वह करीब एक बीघे में दो तरह क़े सलाद पत्ते की खेती कर रहे हैं. इस खेती से लगभग उन्हें 60-70 हजार रुपए मुनाफा एक फसल पर हो रहा है.इसकी खेती करने वाले किसान अशोक ने लोकल 18 से बातचीत में बताया करीब 10 सालों से सलाद पत्ता की खेती कर रहे हैं. इसकी खेती अन्य फसलों के मुकाबले काफी अच्छी है क्योंकि इस खेती में लागत क़े हिसाब से मुनाफा ज्यादा है. उन्होंने एक बीघे में दो तरह के सलाद पत्ते लगाए हैं. एक हरा और एक लाल किस्म का है. एक बीघे में उनकी लागत करीब 10-15 हजार रुपये आती है और मुनाफा करीब एक फसल पर 60-70 हजार रुपए तक हो जाता है. इस सलाद पत्ते की बड़े-बड़े होटल और रेस्टोरेंट में काफी ज्यादा डिमांड रहती है. इस समय हमारा सलाद पत्ता निकल भी रहा है और अच्छे रेट में जा भी रहा है.उन्होंने बताया कि इसकी खेती करना बहुत आसान है. पहले खेत की गहरी जुताई करते हैं और गोबर की खाद का छिड़काव करते हैं उसके बाद खेत बराबर करके सलाद के पत्तों के बीजों की बुवाई की जाती है. जब पौधा निकल आता है तब इसकी सिंचाई करनी होती है. इसकी बुवाई करने के महज 40 से 45 दिनों बाद फसल तैयार हो जाती है जिसे तोड़कर बाजारों में बेच सकते हैं.FIRST PUBLISHED : December 31, 2024, 23:04 IST

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