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Kanpur News: Treatment with hands, not machines: Pain persists even after X-ray and MRI; this natural therapy technique will work : Uttar Pradesh News

कानपुर:  दर्द के इलाज की दुनिया में अब तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पहले मशीनों, दवाओं और ऑपरेशन को ही अंतिम विकल्प माना जाता था, वहीं अब हाथों से की जाने वाली मैन्युअल थेरेपी मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है. यह थेरेपी न सिर्फ दर्द की जड़ तक पहुंचने में मदद कर रही है, बल्कि बिना सर्जरी और ज्यादा दवाओं के राहत भी दे रही है.

मैन्युअल थेरेपी से मिल रही नई राहतमैन्युअल थेरेपी में प्रशिक्षित फिजियोथैरेपिस्ट अपने हाथों से शरीर के जॉइंट, मसल्स और नर्व सिस्टम की गहराई से जांच करते हैं. इससे उन समस्याओं का पता चलता है, जो अक्सर मशीनों की रिपोर्ट में सामने नहीं आतीं. इसी पद्धति ने दर्द के इलाज में एक नई दिशा खोल दी है.

डॉ. एसपी सिंह की अहम भूमिकाइस बदलाव में कानपुर के फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. एस. पी. सिंह की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वे पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से फिजियोथैरेपी और मैन्युअल थेरेपी के क्षेत्र में कार्यरत हैं और वैज्ञानिक तरीके से इस थेरेपी को मरीजों तक पहुंचा रहे हैं.

यूपी से इकलौते फेलोशिप प्राप्त विशेषज्ञडॉ. एस. पी. सिंह ने हाल ही में मैन्युअल थेरेपी फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित “फेलोशिप इन मैन्युअल थेरेपी एंड कंबाइंड मैन्युअल थेरेपी प्रोग्राम” को सफलतापूर्वक पूरा किया है. वे उत्तर प्रदेश के पहले बैच के उन चुनिंदा फिजियोथैरेपिस्ट में शामिल रहे, जिन्होंने यह प्रतिष्ठित फेलोशिप हासिल की. यह फेलोशिप पूरी तरह Scientific Evidence Based Practice पर आधारित है.

मशीनें नहीं बतातीं हर दर्द की वजहडॉ. सिंह के अनुसार कई बार मरीजों की X-ray या MRI रिपोर्ट सामान्य आती है, लेकिन इसके बावजूद दर्द बना रहता है. इसकी वजह जॉइंट डिसफंक्शन, पेल्विक असंतुलन या मसल्स की गलत मूवमेंट हो सकती है. मैन्युअल थेरेपी में हाथों से की जाने वाली जांच के जरिए इन छिपी समस्याओं की पहचान की जाती है, जो मशीनों से संभव नहीं हो पाती.

किन समस्याओं में मिल रही बेहतर राहतमैन्युअल थेरेपी से खासतौर पर लंबे समय से चले आ रहे कमर और गर्दन के दर्द में अच्छे परिणाम मिल रहे हैं. इसके अलावा सायटिका, बैक पेन, घुटने, कूल्हे और टखने का दर्द, शोल्डर पेन, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, सैक्रोइलियक जॉइंट डिसफंक्शन, माइग्रेन, वर्टिगो, कॉक्सिक्स और थोरैसिक पेन जैसी समस्याओं में भी मरीजों को राहत मिल रही है.

उन्नत तकनीकों का किया जा रहा उपयोगडॉ. एस. पी. सिंह द्वारा Maitland Technique, जॉइंट मोबिलाइजेशन और नियंत्रित मैनिपुलेशन जैसी उन्नत तकनीकों का प्रयोग किया जाता है. इन तकनीकों से जॉइंट की मूवमेंट बेहतर होती है, मसल्स का तनाव कम होता है और शरीर का प्राकृतिक संतुलन दोबारा स्थापित होता है.

मरीज की जरूरत के अनुसार इलाजमैन्युअल थेरेपी में इलाज किसी एक तय फॉर्मूले पर नहीं होता. हर मरीज की समस्या, उम्र और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपचार की योजना बनाई जाती है. यही कारण है कि यह थेरेपी लंबे समय तक टिकाऊ राहत देने में सफल साबित हो रही है.

बिना सर्जरी दर्द से मुक्ति की उम्मीदविशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युअल थेरेपी भविष्य में दर्द के इलाज का एक मजबूत विकल्प बन सकती है. बिना ऑपरेशन और कम दवाओं के सहारे दर्द से राहत मिलने की यह पद्धति मरीजों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कानपुर में डॉ. एस. पी. सिंह का कार्य इस बदलती सोच का सशक्त उदाहरण माना जा रहा है.

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