Last Updated:February 09, 2026, 23:38 ISTखीरी की आराधना ने अपने हुनर और मेहनत से जीवन को नई दिशा दी। पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और ऐक्रेलिक धागों से हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर एक सफल कारोबार खड़ा किया. अपने समूह “कृषि प्रेरणा स्वयं सहायता समूह” के माध्यम से वह अब 15 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दे रही हैं. भगवान की पोशाक, गमले, झालर, जूड़ा, बैग और अन्य सजावटी वस्तुएं उनके हाथों की बारीक कारीगरी का प्रतीक बन चुकी हैं. उनकी कहानी मेहनत, हुनर और सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है.ख़बरें फटाफटलखीमपुर. महिलाओं को कभी केवल घर की जिम्मेदारी तक सीमित समझा जाता था, लेकिन अब महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. समय के साथ-साथ महिलाओं की किस्मत भी बदल रही है. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने लिए रोजगार सृजित कर रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम हो रही हैं. खीरी जिले की रहने वाली आराधना ने मेहनत और हुनर के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है. आराधना ने अपने हुनर को सफल कारोबार में बदल दिया है. ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र तक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं. स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को एक नई पहचान मिल रही है. गोला के मुन्नूगंज की रहने वाली आराधना ने बातचीत में बताया कि उनके समूह का नाम “कृषि प्रेरणा स्वयं सहायता समूह” है. इस समूह के माध्यम से महिलाएं हैंडमेड सामग्री तैयार करती हैं, अगर समूह की संरचना की बात करें तो इसमें कुल 15 महिलाएं शामिल हैं. आराधना के हाथों के हुनर से उन्हें एक नई पहचान मिली है.
आराधना की यूपी दिवस पर मिल चुका है सम्मान
आराधना ऐक्रेलिक धागों से बनी हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करती हैं, उनके समूह की महिलाओं द्वारा भगवान की पोशाक, गमले, झालर, जूड़ा, बोतल कवर, बैग, टोपी और फूल सहित सैकड़ों प्रकार की सजावटी और उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं. उनकी पहचान हाथों की बारीक और सजीव कारीगरी के लिए है, जिसे बाजार में खूब सराहा जा रहा है. लोकल 18 से बातचीत में आराधना ने बताया कि बचपन में उन्होंने यह हुनर अपनी दादी और नानी से खेल-खेल में सीखा था, जो आज उनके जीवन का एक सहारा बन गया है. लगभग आठ वर्ष पहले उनके पति की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हो गई थी. इसके बाद आराधना ने अपने हाथों से घर पर ही धागों से उत्पाद तैयार करना शुरू किया, जो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं. लगातार खीरी जिले के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी उनकी उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है. आराधना की इस प्रतिभा को देखते हुए उन्हें यूपी दिवस पर सम्मान भी मिल चुका है. वह लगातार महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं
About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Lakhimpur,Kheri,Uttar PradeshFirst Published :February 09, 2026, 23:38 ISThomeuttar-pradeshखीरी की आराधना ने धागों से बुना कारोबार और महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भरता

