Last Updated:January 15, 2026, 14:27 ISTIron Nails/ clincher Made Process: आज आधुनिक दौर में बनने वाली बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतों, शॉपिंग मॉल और रिहायशी भवनों में करोड़ों कीलों का इस्तेमाल होता है. पर बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर ये लोहे की कील बनती कैसे है. न्यूज 18 की टीम आपको लेकर पहुंची एक ऐसी फैक्ट्री में, जहां ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए हर मिनट सैकड़ों कीलें तैयार की जाती हैं.लोहे की कील.गाजियाबाद: घर बनाना हो, फर्नीचर तैयार करना हो या फिर किसी बड़ी इमारत का निर्माण… एक छोटी सी चीज हर जगह काम आती है. वो कुछ और नहीं बल्कि लोहे की कील है. आकार में भले ही यह छोटी हो, लेकिन इसकी अहमियत बेहद बड़ी है. देसी भाषा में इसे कहीं चौबे तो कहीं तासे कहा जाता है. बिना कील के न लकड़ी जुड़ सकती है और न ही निर्माण को मजबूती मिल सकती है. आइए जानते हैं आखिर ये कील कैसे बनती हैं…
आज आधुनिक दौर में बनने वाली बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतों, शॉपिंग मॉल और रिहायशी भवनों में करोड़ों कीलों का इस्तेमाल होता है. पर बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर ये लोहे की कील बनती कैसे है. न्यूज 18 की टीम आपको लेकर पहुंची एक ऐसी फैक्ट्री में, जहां ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए हर मिनट सैकड़ों कीलें तैयार की जाती हैं.
कच्चे माल से होती है शुरुआतकील बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत कम कार्बन वाले स्टील वायर रॉड से होती है. इस स्टील रॉड को सबसे पहले वायर ड्राइंग मशीन में डाला जाता है, जहां इसे अलग-अलग डाई से खींचकर पतला किया जाता है. इससे तार का व्यास कम होता है और वह कील बनाने के लिए सही आकार में आ जाता है.
ऑटोमैटिक मशीन बनाती है कीलइसके बाद यह सीधा और पतला किया हुआ तार कील बनाने वाली ऑटोमैटिक मशीन में पहुंचता है. मशीन सबसे पहले तार को तय लंबाई में काटती है. फिर एक सिरे पर दबाव डालकर कील का सिर (हेड) बनाया जाता है, जबकि दूसरे सिरे को नुकीला किया जाता है, ताकि कील आसानी से लकड़ी या दीवार में घुस सके.
पॉलिशिंग और गैल्वेनाइजिंगबनी हुई कीलों को चमकदार और चिकना बनाने के लिए उन्हें पॉलिशिंग मशीन में डाला जाता है. यहां लकड़ी के बुरादे या फोम के साथ कीलों को घुमाया जाता है. जंग से बचाने के लिए कई कीलों पर जिंक कोटिंग (गैल्वेनाइजिंग) भी की जाती है.
पैकेजिंग और बाजार तक सफरअंत में तैयार कीलों को गिनकर पैक किया जाता है और फिर इन्हें बाजार भेज दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया पूरी तरह मशीनों से होती है, जिससे कम समय में बड़ी मात्रा में कीलें तैयार हो जाती हैं. छोटी-सी दिखने वाली यह लोहे की कील दरअसल हर इमारत की मजबूती की नींव होती है, जिसके बिना निर्माण की कल्पना भी अधूरी है.Location :Ghaziabad,Uttar PradeshFirst Published :January 15, 2026, 14:27 ISThomeuttar-pradeshजिस लोहे की कील के बिना अधूरी है इमारत, वो आखिर बनती कैसे हैं? जान चौंक जाएंगे

