Uttar Pradesh

झोपड़ी से शुरू किया काम, आज नेपाल तक पहुंच रही फसल, मशरूम की खेती से यह महिला हुई मालामाल, mushroom cultivation transformed lives women demand nepal

Last Updated:January 08, 2026, 20:29 ISTAgriculture News: समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं. इसी कड़ी में जिले की कई महिलाएं मशरूम की खेती अपनाकर प्रतिदिन हजारों रुपये की आमदनी कर रही हैं. बाजार में मशरूम की लगातार बढ़ती मांग के चलते महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है.लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं. समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं. इसी कड़ी में जिले की कई महिलाएं मशरूम की खेती अपनाकर प्रतिदिन हजारों रुपये की आमदनी कर रही हैं. बाजार में मशरूम की लगातार बढ़ती मांग के चलते महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है.

खीरी जिले के विकासखंड निघासन के ग्राम लालापुर की रहने वाली मीरा देवी इसका सशक्त उदाहरण है. मीरा देवी ‘ज्योति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं, जबकि उनके ग्राम संगठन का नाम ‘खुशी प्रेरणा ग्राम संगठन’ है. मीरा देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. उनके पति श्रमिक के रूप में काम करते थे, जिससे परिवार की आय बेहद सीमित थी. दो बच्चों की परवरिश और घर का खर्च चलाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था.

नेपाल तक मशरूम की मांग

वर्ष 2015 में मीरा देवी ने स्वयं सहायता समूह की स्थापना की और समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का निर्णय लिया. वर्ष 2022 में उन्होंने जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया, जबकि 2023 में मशरूम उत्पादन का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की. सर्दियों के मौसम में मीरा देवी झोपड़ी में मशरूम का उत्पादन करती हैं, जो आसानी से स्थानीय बाजारों में बिक जाता है. इतना ही नहीं, उनके द्वारा उत्पादित मशरूम की मांग पड़ोसी देश नेपाल तक में है.

मशरूम की खेती से होने वाली आय ने मीरा देवी की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. वर्तमान में वे न केवल स्वयं अच्छा मुनाफा कमा रही हैं, बल्कि अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रही हैं. इसके साथ ही वे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक भी कर रही हैं.

महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरणा

मीरा देवी बताती हैं कि इस समय बाजार में मशरूम 100 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है. यदि एक महीने की आय की बात करें, तो वे आसानी से लगभग एक लाख रुपये तक कमा लेती हैं. मशरूम की खेती ने उनके जीवन को नई दिशा दी है, इसी कारण वे अन्य महिलाओं को भी इस व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं. यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल बन रही है.About the Authorआर्यन सेठआर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.Location :Lakhimpur,Kheri,Uttar PradeshFirst Published :January 08, 2026, 20:29 ISThomebusinessझोपड़ी से नेपाल तक का सफर, मशरूम की खेती से यह महिला हुई मालामाल

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