झांसी में दाऊ के समोसे अपनी खुशबू, कुरकुरापन और मसालेदार आलू भरावन के लिए मशहूर हैं। सुबह से शाम तक दुकान के बाहर लंबी लाइन लगती है। दाऊ हाथ से तैयार किए गए समोसे हर उम्र के लोगों के दिल जीत लेते हैं। गरम तेल में सुनहरे रंग में तले हुए समोसे, साथ में दी जाने वाली मीठी-खट्टी चटनी, और साफ-सुथरी दुकान का भरोसा—यही वजह है कि हर कोई बार-बार लौटता है।
दाऊ के समोसे बहुत मशहूर हैं, दाऊ के समोसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक दाऊ की दुकान के बाहर लोगों की लंबी लाइन लग जाती है। गरम-गरम समोसे देखकर मन खुश हो जाता है, दाऊ अपने हाथ से समोसे बनाते हैं। आटा गूंधकर छोटी लोई तैयार करते हैं, फिर उसमें मसाले वाला आलू भर देते हैं। यह आलू ताज़ा और साफ होता है और स्वाद से भरपूर होता है, आलू के साथ मिक्स होने वाले मसालों की खुशबू दूर तक फैल जाती है। समोसे को गरम तेल में तल दिया जाता है, गरम तेल में समोसे जब सुनहरे रंग में कड़ाही से बाहर आते हैं, तो दुकान के बाहर खड़ी लोगों की भीड़ मन मुताबिक समोसे पैक करवा कर अपने घर ले जाती है।
दाऊ समोसे की सबसे बड़ी पहचान यह है कि समोसे बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होते हैं। एक बार खाने के बाद लोग बार-बार आने लगते हैं, बच्चे, बूढ़े और जवान सभी को दाऊ के समोसे बहुत पसंद हैं। स्कूल के बाद बच्चे सीधे दुकान पर पहुंच जाते हैं, और काम से लौटते लोग भी यहां रुक जाते हैं। दाऊ हर ग्राहक से हंसकर बात करते हैं, दुकान पर भीड़ ज्यादा होने पर भी दाऊ धैर्य रखते हैं और सभी ग्राहकों को समोसे के साथ मीठी और खट्टी चटनी भी देते हैं। दाऊ की चटनी समोसे के स्वाद को और भी बढ़ा देती है, समोसे का दाम भी बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए लोग यहां आते हैं।
दुकान पर साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है, रोज़ यहां तेल भी साफ और ताज़ा रखा जाता है। इसी वजह से लोग भरोसा करते हैं, त्योहार के दिन तो और भी ज्यादा भीड़ हो जाती है। कई लोग पार्सल लेकर अपने घर भी जाते हैं, बाहर से आए मेहमानों को भी यहां जरूर लाया जाता है। झांसी की पहचान बन चुके दाऊ के समोसे आज भी पुराने लोग बताते हैं कि इसका स्वाद सालों से नहीं बदला है। दाऊ ने मेहनत और ईमानदारी से नाम कमाया है, दाऊ के समोसे की सादगी और स्वाद लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है। लोग अपने दोस्तों के साथ खड़े होकर समोसे खाते हैं और हंसते हैं। दाऊ के समोसे झांसी की शान हैं और इसकी जान।

