जौनपुर में बेमौसम खेती से किसानों की आय दोगुनी, जानिए क्या है तरिका
जौनपुर के किसान अब पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं। बेमौसम सब्जी और फलों की खेती से वे सामान्य फसल की तुलना में दोगुना लाभ कमा रहे हैं। पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और स्ट्रॉबेरी जैसी आधुनिक तकनीकों से उत्पादन बढ़ रहा है, जबकि रोगमुक्त पौधों और सरकारी प्रशिक्षण से फसल की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
जिले में कई किसान बेमौसम खेती अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने बताया कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से ऑफ-सीजन यानी बेमौसम सब्जी और फलों की खेती करें तो उन्हें सामान्य फसल की तुलना में दोगुना तक लाभ मिल सकता है। बेमौसम खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बाजार में उस समय फसल की आपूर्ति कम रहती है, जिससे कीमतें अधिक मिलती हैं।
उदाहरण के तौर पर टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, लौकी, तरबूज और खरबूजा जैसी फसलें यदि पॉलीहाउस या शेडनेट हाउस में उगाई जाएं तो किसान बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा स्ट्रॉबेरी और विदेशी सब्जियों की खेती भी लाभकारी साबित हो रही है।
रोगमुक्त करे खेती
सीमा सिंह राणा ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रमाणित और उन्नत किस्म के पौधे ही लगाएं। इसके लिए जिले की मॉर्डन नर्सरी से पौधे लेकर खेती करना फायदेमंद रहेगा। मॉर्डन नर्सरी में उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और अधिक उत्पादन देने वाले पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है और नुकसान की संभावना कम होती है।
उद्यान विभाग द्वारा किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। पॉलीहाउस निर्माण, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग तकनीक और जैविक खाद के उपयोग की जानकारी देकर खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पॉलीहाउस और सिंचाई उपकरणों पर अनुदान भी उपलब्ध है, जिसका लाभ उठाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
पहले करे यह काम
जिला उद्यान अधिकारी ने कहा कि बेमौसम खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य कराएं और फसल का चयन बाजार की मांग के अनुसार करें। सही समय पर रोपाई, संतुलित खाद और कीटनाशकों का प्रयोग और नियमित निगरानी से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

