शाश्वत सिंह/झांसी: आईवीएफ एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में असफल रहे लोगों के लिए एक वरदान साबित हुआ है. लेकिन, विज्ञान की इस देन का कुछ लोग गलत इस्तेमाल करने की भी योजना बनाते हैं. भारत में रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोग बेटे की चाह में आईवीएफ प्रोसेस का इस्तेमाल करना चाहते हैं.लेकिन, क्या वाकई आईवीएफ प्रक्रिया से आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो बच्चा पैदा हो वह लड़का ही हो? क्या यह संभव है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 ने आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ प्रमोदिता अग्रवाल से बात की है. आईवीएफ एक्सपर्ट ने बताया कि अगर वैज्ञानिक तौर पर बात करें तो यह संभव है.
इस तरह लगता है लिंग का पताअगर महिला का X क्रोमोजोम लेकर पुरुष के Y क्रोमोजोम को मिलाया जाए तो यह संभव है. लेकिन, भारत में इस लेवल का टेस्ट कहीं भी नहीं होता है. इसके साथ ही जब एंब्रियो तैयार होता है उस समय भी जांच करके बच्चे का लिंग पता किया जा सकता है.
कानूनी-सामाजिक रूप से गलतडॉ. प्रमोदिता अग्रवाल ने कहा कि विज्ञान तो सब कुछ मुमकिन कर सकता है, लेकिन कानूनी रूप से जन्म से पहले किसी बच्चे का लिंग पता करना या लिंग तय करने की कोशिश करना भी कानूनी अपराध है. इसमें शामिल होने वाले हर व्यक्ति को जेल हो सकती है. डॉ. अग्रवाल ने कहा कि बेटा और बेटी में फर्क करना कानूनी रूप से और सामाजिक रूप से पूरी तरह गलत है. यह अपराध है. बच्चे का लिंग कुछ भी हो उसे दुनिया में पैदा होने का पूरा हक है..FIRST PUBLISHED : November 3, 2023, 11:46 IST
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