Success Story: कहते हैं अगर इंसान के इरादे मजबूत हों और मेहनत करने का जज़्बा हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं रहती। मऊ जनपद के अतरारी ग्राम सभा के रहने वाले सोनू सोनकर की कहानी इसी कहावत को सच साबित करती है. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद सोनू ने हिम्मत नहीं हारी और आज वह न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं.
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते पूरी नहीं कर पाए पढ़ाईसोनू सोनकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाई स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने टाउन इंटर कॉलेज से वर्ष 2020 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. पढ़ाई पूरी होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि आगे की पढ़ाई या कोई बड़ा व्यवसाय शुरू किया जा सके. घर की जिम्मेदारियां और रोजी-रोटी की चिंता ने उन्हें जल्दी काम शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया.
दोस्तों से कर्ज लेकर लगाया ठेला
रोजगार की तलाश में सोनू ने दोस्तों से मदद मांगने का फैसला किया. शुरुआत में कई दोस्त कर्ज देने से हिचक रहे थे, लेकिन सोनू के आत्मविश्वास और मेहनत के भरोसे तीन-चार दोस्तों ने मिलकर उन्हें करीब 35 हजार रुपये की मदद दी. इसी रकम से सोनू ने एक ठेला खरीदा और उस पर जैकेट, लोवर और टी-शर्ट जैसे कपड़े बेचने का काम शुरू किया. वह रोजाना चार से पांच किलोमीटर तक घूम-घूमकर कपड़े बेचते थे. धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और फुटपाथ पर दुकान लगाने की शुरुआत हुई.
कोरोना ने बदली किस्मतहालांकि, इसी बीच कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने उनकी राह मुश्किल कर दी. फुटपाथ पर दुकान लगाना बंद हो गया, लेकिन सोनू ने हार नहीं मानी. परिचित लोगों की मदद से उन्होंने एक छोटा सा कमरा किराये पर लिया और वहीं से दुकान चलाने लगे. वह रोज सुबह दुकान खोलते और देर रात तक मेहनत करते. सोनू का कहना है कि उन्होंने कभी क्वालिटी से समझौता नहीं किया और कम दाम में अच्छा सामान देने की नीति अपनाई.
आज शोरूम के बने मालिक
लगातार मेहनत, ईमानदारी और ग्राहकों के भरोसे का ही नतीजा है कि करीब 6 से 7 साल के संघर्ष के बाद आज सोनू सोनकर अपनी छोटी दुकान से आगे बढ़कर एक शोरूम के मालिक बन चुके हैं. जिस व्यक्ति के पास कभी अपने खर्च के लिए पैसे नहीं होते थे, वही आज तीन लोगों को रोजगार दे रहा है.
मेहनत से पाई सफलता
सोनू बताते हैं कि इस सफर में उनके परिवार का पूरा सहयोग रहा. जब दोस्त उनकी दुकान पर आकर कहते हैं कि “तुमने जो कहा था, वह कर दिखाया,” तो उन्हें गर्व महसूस होता है. सोनू की कहानी आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि सीमित साधनों में भी मेहनत और विश्वास के साथ सफलता पाई जा सकती है.

