Last Updated:May 31, 2025, 17:54 ISTप्रयागराज के करेली क्षेत्र में रहने वाले पप्पू बुलेट का असली नाम भले ही कुछ और हो, लेकिन शहर में उन्हें इसी उपनाम से जाना जाता है. उनकी पहचान का कारण है बुलेट मोटरसाइकिलों के प्रति उनका जुनून. वे साल 1947 से अब…और पढ़ें अक्सर लोग अपने शौक को सिर्फ एक मनोरंजन का साधन मानते हैं, लेकिन पप्पू बुलेट ने इसे अपनी पहचान और विरासत बना लिया है. उनके पिता भी पुराने सामान के शौकीन थे और उन्होंने ही सबसे पहले पप्पू को बुलेट पर बैठाया था. तभी से यह लगाव शुरू हुआ. उन्होंने न सिर्फ बाइकों को इकट्ठा किया, बल्कि उन्हें संभालकर एक ऐतिहासिक संग्रह का रूप दिया. उनका यह जुनून अब विरासत बन चुका है, जिसे वह अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं. पप्पू बुलेट के पास आजादी के बाद से अब तक जितने भी मॉडल्स की रॉयल एनफील्ड बुलेट आई हैं, लगभग सभी मौजूद हैं. चाहे क्लासिक मॉडल हो, थंडरबर्ड या फिर इंटरसेप्टर हर युग की बाइक उनके पास संजोई गई है. उनका कहना है कि हर बाइक अपने जमाने की कहानी कहती है. यही कारण है कि वे हर नए मॉडल को अपने संग्रह में जोड़ते हैं. उनके घर को बुलेट म्यूजियम कहा जाए, तो गलत नहीं होगा. पप्पू बुलेट ने अपने घर को ही बुलेट संग्रहालय में तब्दील कर दिया है. यहां एक दर्जन से ज्यादा बुलेट मोटरसाइकिलें सजी हुई हैं. वे न केवल इन्हें रखे हुए हैं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करते हैं. इनमें से अधिकांश बुलेट अब भी चलने की स्थिति में हैं. हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे इन बाइकों के साथ रैली निकालते हैं, जिससे उनका जुनून और देशभक्ति दोनों झलकते हैं. कुछ बुलेट ऐसी भी हैं जो अब चलने लायक नहीं रहीं, लेकिन पप्पू बुलेट ने उन्हें कबाड़ में बेचने के बजाय घर के स्टोर में सहेजकर रखा है. उनके अनुसार ये बाइकें न केवल पुरानी यादें ताजा करती हैं, बल्कि उनके पिता और दादा की याद भी दिलाती हैं. इसके अलावा ये गाड़ियां उनके संग्रह को और भी ऐतिहासिक बनाती हैं, जिससे देखने वालों को अतीत की झलक मिलती है. पप्पू बुलेट के पास एक बेहद दुर्लभ मॉडल है. एक ऐसी बुलेट जो इंजन के साथ पैडल से भी चलाई जा सकती है. यह बाइक आज के युग में कहीं नहीं मिलती. इस मॉडल को बनाने वाली कंपनी भी अब बंद हो चुकी है. यह बुलेट अब भले ही कबाड़ हो चुकी है, लेकिन उनके संग्रह की शान है. यह बाइक उन पुराने तकनीकों की याद दिलाती है, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी ने कभी देखा भी नहीं होगा. उनके पास द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई फोल्डिंग बाइक भी मौजूद है, जिसे वे विशेष अवसरों पर आगे चलकर तिरंगा यात्रा में शामिल करते हैं. यह फोल्डिंग बाइक युद्धकालीन तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है, जिसे सैनिक प्रयोग में लाते थे. पप्पू बुलेट इसे खास एहतियात से संभालते हैं और इसे अपनी धरोहर मानते हैं. यह दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है. बाइकों के अलावा भी पप्पू बुलेट के पास कई पुरानी चीजें मौजूद हैं जैसे ग्रामोफोन, फोल्डिंग साइकिल और पुराने रेडियो. वे इन सबकी देखभाल खुद करते हैं और इन्हें कहीं भी स्थानांतरित नहीं करना चाहते. उनका मानना है कि इन वस्तुओं को सरकारी संग्रहालय में देने से इनका व्यक्तिगत जुड़ाव खत्म हो जाएगा. इसीलिए वे अब तक हर प्रस्ताव को अस्वीकार करते आ रहे हैं. हाल ही में सरकार ने उनकी विंटेज बाइक और अन्य वस्तुओं की सुरक्षा व देखरेख के लिए सहायता देने की पहल की थी, लेकिन पप्पू बुलेट ने इनकार कर दिया. उनका मानना है कि यह संग्रह उनका निजी सपना और उनकी मेहनत का परिणाम है, जिसे वे खुद ही संजोना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि लोग आएं, देखें और इतिहास को महसूस करें.homeuttar-pradeshइस शख्स के गैराज में छुपा है बुलेट का टाइम ट्रैवल! 1947 से 2025 तक की सभी बाइक
Škoda Auto India partners with CSC Grameen eStore to expand reach across India
Škoda Auto India has taken a significant step towards expanding its reach beyond urban strongholds by announcing a…

