Uttar Pradesh

इस मुस्लिम शासक ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, हिंदू आस्था का भी रखा पूरा सम्मान।

पीलीभीत में अफगान से आए रोहिल्लाओं का राज, जामा मस्जिद का निर्माण हाफिज रहमत खान ने किया था

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के नाम से पहचान रखने वाले शहर पर लंबे अरसे तक अफगान से आए रोहिल्लाओं ने राज किया था. उस दौर में पीलीभीत में बुनियादी ढांचे समेत तमाम निर्माण कार्य कराए गए थे. मगर रोहिल्ला सरदार हाफिज रहमत खान द्वारा कराया गया एक निर्माण कार्य आज भी गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल के रूप में देखा जाता है।

पीलीभीत समेत आसपास के इलाकों में लंबे अरसे तक रोहिल्लाओं का शासन रहा था. इसी के चलते आगे चलकर यह इलाका रोहिलखंड कहलाया. अगर पीलीभीत की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि इस शहर को मूल रूप से बंजारों ने बसाया था. जिनकी संख्या भी काफी कम हुआ करती थी. रोहिल्लाओं के शासन के दौरान यहां हाफिज रहमत खान का राज था. जिसके चलते पीलीभीत उस कालखंड में हाफिजाबाद के नाम से जाना जाता था।

पीलीभीत में जामा मस्जिद का निर्माण कराया हाफिज रहमत खान ने अपने शासनकाल के दौरान यहां कई निर्माण कार्य कराए. जिसमें जामा मस्जिद सबसे प्रमुख मानी जाती है. लेकिन शायद कम ही लोग जानते होंगे कि शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक गौरीशंकर मंदिर के प्रवेश द्वार का भी निर्माण कराया था. जामा मस्जिद के निर्माण के इतिहास पर अधिक जानकारी देते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री बताते हैं कि बुजुर्गों और जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के कई सदस्यों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर आज जामा मस्जिद मौजूद है. वहां कभी एक तालाब हुआ करता था. एक समय में पीलीभीत (तब के हाफिजाबाद) में भुखमरी फैल गई थी. ऐसे में तत्कालीन शासक हाफिज रहमत खां ने पीलीभीत में जामा मस्जिद का निर्माण कराया.

गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेशजिससे निर्माण कार्य के साथ ही साथ स्थानीय लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके. वहीं इसी कालखंड के दौरान रोहिल्ला शासक के दीवान मान राय ने गौरीशंकर मंदिर में प्रवेश द्वार बनाने का प्रस्ताव रखा. हिंदुओं की गौरीशंकर मंदिर में आस्था को देखते हुए हाफिज रहमत खां ने इस प्रस्ताव तो मंजूरी दे दी. रोहिल्ला शासनकाल में हुए यह निर्माण कार्य आज भी गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हैं।

यह निर्माण कार्य पीलीभीत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. जिसने न केवल स्थानीय लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब कराई बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक बन गया. आज भी पीलीभीत में जामा मस्जिद और गौरीशंकर मंदिर के प्रवेश द्वार की सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है. यह निर्माण कार्य पीलीभीत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान है और यह शहर की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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