Uttar Pradesh

इस गांव के लोग प्रधान से थर-थर कांपते हैं! कैमरे के सामने समस्या बताने में भी डर, कहा- नरकीय स्थिति

शाहजहांपुर: औरंगाबाद गांव में विकास के नाम पर डराया जा रहा है, लेकिन सड़कों की स्थिति कैमरे के सामने प्रधान के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं ग्रामीण.

विकासखंड पुवायां के गांव औरंगाबाद में विकास के दावे कागजी नजर आ रहे हैं, लेकिन यहां सड़क किनारे नाली निर्माण न होने से घरों का गंदा पानी गलियों में बह रहा है, जिससे पूरा गांव तालाब में तब्दील हो गया है. हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण प्रधान के रसूख से इतने खौफजदा हैं कि वे कैमरे के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे. दबी जुबान में ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने विकास कार्यों में जमकर पक्षपात किया है और केवल अपने चहेतों के घर तक ही सड़कें और नालियां बनवाई हैं।

गांव की स्थिति नरकीय हो चुकी है, सड़क के किनारे नाली न होने के कारण सारा गंदा पानी गलियों में जमा हो रहा है. कच्ची गलियां होने के कारण हल्की बारिश में भी पैदल चलना दूभर हो जाता है. बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और बुजुर्गों का घर से निकलना बंद हो गया है. प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हम बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान ने विकास कार्यों में वोट बैंक की राजनीति की है. एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि प्रधान ने केवल उन्हीं गलियों में इंटरलॉकिंग और नालियों का निर्माण कराया है, जहां उनके समर्थक रहते हैं. जिन लोगों ने चुनाव में उनका साथ नहीं दिया, उनकी गलियां आज भी कच्ची हैं और वहां जलभराव की समस्या बनी हुई है. यह भेदभाव गांव के सामूहिक विकास में बड़ी बाधा बन रहा है।

गांव में खौफ का आलम यह है कि कोई भी व्यक्ति खुलकर कैमरे पर अपनी परेशानी बताने को तैयार नहीं है. ग्रामीणों को डर है कि अगर उन्होंने आवाज उठाई, तो भविष्य में उनके बचे हुए काम भी रोक दिए जाएंगे या उन्हें निजी तौर पर प्रताड़ित किया जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने हक की बात भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि प्रधान और उनके करीबियों का गांव में खासा प्रभाव और दबदबा है।

गलियों में बहते गंदे पानी और जमा कीचड़ के कारण गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों ने बताया कि मच्छरों के प्रकोप से लोग परेशान हैं. नालियों के अभाव में पानी की निकासी का कोई जरिया नहीं है, जिससे दुर्गंध इतनी बढ़ गई है कि घरों के दरवाजे बंद रखने पड़ते हैं.

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