Last Updated:January 04, 2026, 14:24 ISTIPS Rashmi Shukla Retirement: महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी रश्मि शुक्ला के शानदार और उतार-चढ़ाव भरे करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय अब खत्म हो गया है. हालिया अपडेट के अनुसार, अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वह आधिकारिक रूप से रिटायर हो चुकी हैं.IPS Rashmi Shukla: आईपीएस रश्मि शुक्ला इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट रही हैंनई दिल्ली (IPS Rashmi Shukla Retirement). भारतीय पुलिस सेवा में अपनी धाक जमाने वाली रश्मि शुक्ला का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. वे महाराष्ट्र पुलिस के इतिहास में महानिदेशक (DGP) के पद तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की गलियों से निकलकर देश के सबसे शक्तिशाली पुलिस पदों में से एक को संभालने तक का उनका सफर साहस, अटूट संकल्प और प्रशासनिक दक्षता की मिसाल है.
रश्मि शुक्ला का चयन 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी के रूप में हुआ था. तब से लेकर आज तक उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और खुफिया तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आईपीएस रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद हाल ही में रिटायर हुई हैं. उनके रिटायरमेंट के साथ ही महाराष्ट्र पुलिस के एक ऐसे युग का अंत हुआ है, जिसने महिला नेतृत्व को नई ऊंचाइयों पर देखा.
पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
आईपीएस रश्मि शुक्ला की कार्यशैली की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं. इससे उनके समर्पण और दूरदर्शिता का अंदाजा लगा सकते हैं. हालांकि, आईपीएस रश्मि शुक्ला का करियर केवल उपलब्धियों से ही नहीं भरा रहा, बल्कि वे कई बड़े राजनीतिक विवादों और फोन टैपिंग जैसे संगीन आरोपों के केंद्र में भी रहीं. इन सबके बावजूद, उनकी प्रशासनिक क्षमता और पुलिसिंग के प्रति उनके जुनून ने उन्हें आज इस मुकाम पर खड़ा किया है, जहां वे आने वाली पीढ़ियों के लिए इंस्पिरेशन बन गई हैं.
संघर्ष, सफलता और अब विदाई का सफर
आईपीएस रश्मि शुक्ला का सफर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से शुरू हुआ था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था. उनकी मेहनत रंग लाई और 1988 में वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुनी गईं. रश्मि शुक्ला के करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर महाराष्ट्र की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में उनकी नियुक्ति थी. जनवरी 2024 में कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था को नई दिशा दी. रिटायरमेंट के अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
विवादों से जीत और वापसी
जहां एक तरफ आईपीएस रश्मि शुक्ला ने करियर के दौरान सफलता के झंडे गाड़े, वहीं दूसरी तरफ वे विवादों के घेरे में भी रहीं. महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान उन पर फोन टैपिंग के गंभीर आरोप लगे थे. राजनीतिक गलियारों में उनके खिलाफ जांच और एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन बाद में अदालतों और प्रशासन से उन्हें राहत मिली, जिसके बाद उनकी वापसी और भी प्रभावशाली रही. आईपीएस रश्मि शुक्ला को उनके अचीवमेंट्स और विवादों, दोनों के लिए हमेशा याद किया जाएगा.
महिला सशक्तिकरण का चेहरा रश्मि शुक्ला का मानना है कि वर्दी केवल सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है. उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला.
About the AuthorDeepali PorwalWith more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ेंFirst Published :January 04, 2026, 14:24 ISThomecareerयूपी की बेटी ने हिला दिया पुलिस तंत्र, 37.5 साल की सेवा के बाद रिटायर

