MS Dhoni in IPL 2025: आईपीएल 2025 के आधे से ज्यादा मैच हो चुके हैं और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) यह सीजन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है. प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए टीम संघर्ष करती नजर आ रही है. इस बीच टीम के मौजूदा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बल्ले से स्ट्रगल करते नजर आ रहे हैं. उनका प्रदर्शन उनकी शानदार विरासत के अनुरूप नहीं रहा है, जिसकी उम्मीद उनके फैंस कर रहे हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर क्यों चेन्नई बार-बार फेल होने और टीम की हार के बावजूद धोनी को अपनी टीम का अभिन्न हिस्सा बनाए हुए है? क्यों धोनी चेन्नई के लिए इतने जरूरी हो गए हैं. क्यों एक ऐसा खिलाड़ी टीम के लिए मजबूरी बन गया है, जो अब पहले की तरह रन नहीं बना पा रहा है?
आखिर चेन्नई सुपर किंग्स क्यों ढो रही?
तो इसका जवाब मैदान पर सिर्फ धोनी के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि उससे कहीं आगे चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के ताने-बाने में बुना हुआ है. चेन्नई और अपने फैंस के लिए धोनी सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक युग हैं. धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स को एक फ्रैंचाइजी से कहीं बढ़कर एक भावना की तरह जुड़े हैं. चेन्नई के लोगों को सिर्फ फैंस ना मानकर एक परिवार बनाया है. चेन्नई सुपर किंग्स ने धोनी की करिश्माई कप्तानी में इससे पहले कई बार हर मुश्किल परिस्थिति से लड़कर वापसी करने का जज्बा दिखाया है और पांच बार आईपीएल का खिताब जीता है. यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि सच है कि धोनी की मौजूदगी ही टीम के खिलाड़ियों और प्रशंसकों में एक अलग तरह का आत्मविश्वास भर देती है.
पहले की तरह नहीं खेल पाते, लेकिन…
धोनी भले ही अब पहले की तरह मैच जिताऊ पारी नहीं खेल पाते और फिनिशर वाला वो रूप नजर नहीं आ रहा, लेकिन उनकी रणनीतिक क्षमता और लीडरशिप स्किल आज भी बेजोड़ है. इसके अलावा विकेट के पीछे धोनी की फुर्ती और बीच-बीच में गेंदबाजों को सलाह देने का उनका तरीका बेहद लाजवाब है. मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहकर सही फैसले लेने की धोनी की कला टीम के लिए अनमोल है और आज भी लोग इसके दीवाने हैं. कई बार हम सबने देखा है कि कैसे उनकी छोटी-छोटी सलाह गेंदबाजों को विकेट दिलाने में मददगार साबित हुई हैं. इसके अलावा उनकी चतुराई भरी फील्ड प्लेसमेंट ने विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश लगाया है.
युवाओं को तराशते हैं धोनी
धोनी जब मैदान पर होते हैं तो वो सिर्फ एक खिलाड़ी की भूमिका में नहीं होते हैं, जबकि युवा खिलाड़ियों के लिए एक मेंटर की भूमिका निभाते हैं. धोनी के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करना युवा खिलाड़ियों का सपना होता है और उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने कई युवा प्रतिभाओं को तराशा है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए तैयार किया है. ऋतुराज गायकवाड़ और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, जिन्होंने धोनी के मेंटॉरशिप में अपनी प्रतिभा को निखारा है.
CSK के लिए धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं
धोनी दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में से एक है और इसी वजह से वो चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ब्रांड एंबेसडर भी हैं. धोनी की लोकप्रियता का सीधा फायदा टीम की फैन फॉलोइंग और कमर्शियल सक्सेस पर पड़ता है. मैच के दौरान स्टेडियम में सिर्फ धोनी को देखने के लिए उमड़ने वाली भीड़ और उनके नाम की गूंज इस बात का सबूत है कि धोनी का जादू आज भी बरकरार है. चेन्नई की फ्रेंचाइजी जानती है कि धोनी की मौजूदगी से उन्हें न सिर्फ मैदान पर, बल्कि मैदान के बाहर भी काफी फायदा होता है.
धोनी का विकल्प ढूंढना एक चुनौती
यह भी सच है कि चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए धोनी का एक सफल विकल्प ढूंढना बड़ी चुनौती है. धोनी की जगह लेने के लिए फ्रेंचाइजी को ना सिर्फ एक बल्लेबाज चाहिए, बल्कि उस खिलाड़ी में विकेटकीपर की उतनी है प्रतिभा और कप्तानी क्षमता के अलावा मेटॉरशिप के साथ टीम को साथ लेकर चलने का गुण भी होना चाहिए. फिलहाल, सीएसके के पास धोनी का कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है.
रन नहीं बना रहे, फिर भी बढ़ गया है महत्व
धोनी भले ही टीम के लिए रन नहीं बना रहे हों और उनका बल्ला अब पहले की तरह न चले, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए उनका महत्व कई गुना बढ़ गया है. धोनी टीम के लिए एक खिलाड़ी के अलावा मार्गदर्शक, एक रणनीतिकार, एक इंस्पिरेशन और एक ब्रांड एंबेस्डर बने हुए हैं. शायद यही वजह है कि चेन्नई सुपर किंग्स तमाम आलोचनाओं के बावजूद उन्हें धोनी को नहीं छोड़ रही है. धोनी के आलोचकों के शब्दों में कहें तो यहीं वजह है कि चेन्नई उन्हें ‘ढो’ रही है. क्योंकि, वे जानते हैं कि धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि CSK की आत्मा हैं, जिसे इतनी आसानी से अलग नहीं किया जा सकता. चेन्नई सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि एक भावना है और उसके केंद्र में आज भी ‘थाला’ खड़े हैं.
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