International Epilepsy Day Importance And History: हर साल फरवरी महीने के दूसरे सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय एपिलेप्सी दिवस मनाया जाता है. एपिलेप्सी को हम मिर्गी के नाम से भी जानते हैं. इस साल यह 13 फरवरी को मनाया जा रहा है. मिर्गी (Epilepsy) दिवस मनाने के पीछे का उद्देश्य यह है कि इसके बारे में जागरुकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को बीमारी के लक्षण और निवारक उपायों के बारे में बताना है. कई जगहों पर आयोजित कार्यक्रमों में व्यक्तियों, परिवारों के साथ-साथ समाज के बड़े वर्गों पर मिर्गी के प्रभाव को लेकर चर्चा की जाती है.
क्या है अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस ?अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य लोगों और समाज को मिर्गी के प्रभाव के बारे में बताना है. क्योंकि यह एक ऐसी बीमारी है जो बड़े स्तर पर लोगों के मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है. हालांकि, इस दिन के बारे में जानने से पहले यह जानना आवश्यक है कि मिर्गी की बीमारी क्या है?
आपको बता दें, मिर्गी सेंट्रल नर्वस सिस्टम में होने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि असामान्य हो जाती है. जिसके कारण व्यक्ति को दौरे पड़ने लगते हैं. ये दौरे आमतौर पर असामान्य व्यवहार के अलग-अलग चरण होते हैं, जिनमें जागरुकता की कमी, बेहोशी और झनझनाहट जैसी समस्या शामिल है. मिर्गी जेनेटिक डिसऑर्डर या फिर दिमाग में चोट लगने के कारण भी होती है. यह मस्तिष्क के असामान्य व्यवहार का कारण भी बन जाती है.
मिर्गी के दौरे में क्या होता है?मिर्गी को दौरा पड़ने के रूप में भी जाना जाता है. यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है. इसमें मस्तिष्क में कुछ इलेक्ट्रिक गतिविधियां होती हैं, जिससे बार-बार दौरे पड़ते हैं. जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में करीब 65 मिलियन से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं. आज भी इसे समाज में हीन भावना से देखा जाता है. इसलिए, लोगों को मिर्गी के बारे में शिक्षित करने और ऐसे रोगियों की बेहतर देखभाल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है.
अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस का इतिहासआपको बता दें, अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस दो संगठनों का विचार है, इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE) और इंटरनेशनल ब्यूरो फॉर एपिलेप्सी (IBE). ये दोनों संगठन दिन की शुरुआत से ही लोगों को स्थितियों और इसके प्रभावों के बारे में मार्गदर्शन करने के लिए विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. हर साल इसके लिए एक अलग थीम होती है, जिसके जरिए लोगों को इसके प्रभाव के बारे में बताया जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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