Uttar Pradesh

इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़…युवक बना किसान, शुरू की यह खेती, आज सालाना कमाई 10-12 लाख



कृष्ण गोपाल द्विवेदी/बस्ती: कहते हैं कि जिस काम में मन लगे वही काम आपके लिए बेहतर होता है. आज कल के युवा जहां खेती किसानी से दूर गैलमर और चकाचौध वाली जिंदगी जीना चाहते हैं तो वहीं बस्ती जनपद में एक ऐसा युवा है जिसने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ खेती किसानी करने लगा और अपने मेहनत और लगन के दम पर आज यह युवा लोगों के प्रेरणा का श्रोत बना हुआ है.

हम बात कर रहे हैं बस्ती जनपद के सदर तहसील क्षेत्र के विक्रम कुमार की, जो आज से तीन वर्ष पहले हरियाणा में प्रतिष्ठित कम्पनी में बतौर इंजीनियर काम करते थे. लेकिन उनको इंजीनियरिंग की नौकरी रास नहीं आई और उन्होंने नौकरी छोड़ घर आ गए और खेती किसानी करने का मन बना लिया. जिसका पहले तो उनके घर वालों  ने पुरजोर विरोध किया, लेकिन फिर बाद में विक्रम के हठ के आगे सभी ने हार मान ली और आज विक्रम खेती कर न सिर्फ 12 से 15 लाख रुपए सालाना कमा रहे हैं बल्कि औरों को भी प्रेरणा दे रहे हैं.

करते हैं विभिन्न प्रकार की खेती

विक्रम कुमार ने बताया कि वैसे तो मौसमी खेती ज्यादा करते थे, लेकिन खासकर वो तरबूज, खरबूज, टमाटर, पपीता, गन्ना आदि नगदी की खेती ज़्यादा करते हैं. जिसमें उनको ज्यादा भागदौड़ भी नहीं करनी पड़ती है और व्यापारी उनके खेत में ही आकर मार्केट रेट के आधार पर उनकी तैयार फ़सल को खरीद लेते हैं. अभी मैं लगभग 10 बीघे में ये सारी खेती कर रहा हूं जिसमें ज्यादातर सहफसली माध्यम से खेती करता हूं.किसानों का खासा रुझान सहफसली खेती की ओर है. महंगाई के इस दौर में घर के अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए किसान प्रमुख फसलों के साथ अन्य नकदी फसलें उगा रहे हैं.वहीं हर माह लगभग 60 से 65 हजार की कमाई हो जा रही है.

सहफसली खेती से दोहरा मुनाफा कमा रहे किसान

सब्जी उत्पादकों के लिए भी सहफसली खेती वरदान साबित हो रही है. यानि कि जिले के किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर सहफसली खेती अपनाकर दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं. विक्रम ने बताया कि सहफसली माध्यम से खेती करने से एक ही खेत में कई प्रकार के फसल तैयार हो जाते हैं. जैसे इस खेत में मैंने सबसे पहले तरबूज बोया था फिर बीच में मेड़ी लगाकर उसमें पपीता लगाया फिर एक एक मेडी गैप कर उसमें खरबूज लगाया. इसका मुझे फायदा ये हुआ कि एक ही खाद पानी में मेरा तीन तीन चार चार फसल तैयार हो गए और जैसे जिसका सीजन खत्म होते गया उस फसल को खेत से हटाते गया.
.Tags: Hindi news, Local18, Success Story, UP newsFIRST PUBLISHED : December 8, 2023, 08:34 IST



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