Uttar Pradesh

इजरायल की टेक्‍नोलॉजी से कमाई करेंगे यूपी के क‍िसान, सीएम योगी ने बताया कैसे आएगा खेती में बदलाव

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि खेती को पलायन का नहीं, बल्कि खुशहाली का जरिया बनाना चाहिए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक वैज्ञानिक शोध और तकनीक का फायदा सीधे किसानों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक खेती में बड़ा बदलाव नहीं आ पाएगा. मुख्यमंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के 36वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. यह कार्यक्रम “विकसित कृषि–विकसित उत्तर प्रदेश 2047” विषय पर आधारित था.

किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा शोध का लाभसीएम योगी ने कहा कि आज भी राज्य के सिर्फ 25 से 30 फीसदी किसान ही वैज्ञानिक शोध और तकनीकों का लाभ ले पा रहे हैं. जबकि राज्य में कई कृषि विश्वविद्यालय, विज्ञान केंद्र और अनुसंधान संस्थान मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को किसानों के बीच जाकर उन्हें फसलों, बीजों और तकनीकों की जानकारी देनी होगी, तभी खेती में असली बदलाव आएगा.

जलवायु के बदलाव को लेकर किया सचेत
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर साफ दिख रहा है. अगर मौसम में बदलाव हुआ है और हम पुराने बीज ही इस्तेमाल करते हैं, तो 30% तक पैदावार कम हो सकती है. इसलिए ज़रूरी है कि समय पर किसानों को जानकारी और सही सलाह दी जाए.

इजराइल की तरह टेक्नोलॉजी का उपयोग होसीएम योगी ने बताया कि यूपी सरकार ने इजराइल की मदद से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए हैं, जहां उन्नत खेती के तरीके अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब इजराइल जैसे छोटे देश में इतना विकास हो सकता है, तो हमारे कृषि विश्वविद्यालय क्यों पीछे रहें?

विकसित यूपी के लिए विजन 2047
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन का ज़िक्र करते हुए कहा कि यूपी का लक्ष्य है कि 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बने. इसके लिए सभी क्षेत्रों, खासतौर पर कृषि में बड़े बदलाव करने होंगे. उन्होंने कहा कि हमें शॉर्ट टर्म (2027), मीडियम टर्म (2029) और लॉन्ग टर्म (2035) की योजनाओं पर काम करना होगा.

कार्यक्रम में हुआ सम्मान और प्रदर्शनी का आयोजनकार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि प्रदर्शनी का दौरा किया, न्यूज़ लेटर और पुस्तिकाओं का विमोचन किया और कृषि वैज्ञानिकों, एफपीओ और युवाओं को सम्मानित भी किया. इस मौके पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उद्यान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, गोसेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, प्रमुख सचिव रविंद्र, और कृषि अनुसंधान परिषद के अधिकारी मौजूद थे.

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