Last Updated:June 27, 2025, 23:57 ISTPapaya farming tips : पपीता की खेती गर्म जलवायु में हो सकती है. इसे खेतों में लगाते वक्त दो से ढाई मीटर की दूरी रखें. दोमट मिट्टी खेती के सबसे उपयुक्त है. मुकेश पांडेय/मिर्जापुर : विंध्यक्षेत्र के किसान अगर आप पपीते की खेती करना चाहते है तो यह खबर आपके लिए हैं. खेत में इधर-उधर की बजाय यहां के मौसम के अनुकूल पपीते की बुआई करें. इससे छप्पड़फाड कमाई होगी और बाजार में डिमांड रहेगी. जुलाई और अगस्त महीने से पपीते की बुआई शुरू हो जाती है. मिर्जापुर के किसान N-400 पपीता लगा सकते हैं. इस पपीते को ताइवान पपीता कहा जाता है. कम खर्च के साथ ही किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. एन-400 पपीता की खेती गर्म जलवायु में हो सकती है. इसे खेतों में लगाते वक्त दो से ढाई मीटर की दूरी रखें. अगर गोबर खाद मिल रहा है तो उसका प्रयोग करें. दोमट मिट्टी खेती के सबसे उपयुक्त है और इसपर खेती की जा सकती है. पपीते को ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है. 6 से 7 दिनों में एक बार सिंचाई कर सकते हैं. गोबर खाद न मिलने की स्थिति में खेत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटैशियम का प्रयोग करें. पपीता छह से आठ महीने में फल देना शुरु कर देता है. अगर पौधे अच्छे रहे तो 60 से 80 किलो प्रति पेड़ पैदावार होता है. एक हेक्टेयर में करीब 75 से 100 टन तक उपज होता है. जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि यह पपीता काफी लाभपद्र है. इससे किसानों को नुकसान कम और फायदा ज्यादा होता है. कीट लगने का डर कम रहता है और जबरदस्त पैदावार होता है. बाजारों में सबसे ज्यादा पपीते की डिमांड रहती है. 20 से 100 रुपये किलो तक आराम से बिक्री होती है. परंपरागत खेती से यह खेती किसानों के लिए उपयुक्त है.homeagricultureइस वैरायटी के पपीते न होते खराब, न लगते रोग, बंपर पैदावार की गारंटी
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