Last Updated:February 08, 2026, 18:12 ISTफर्रुखाबाद की शमशाबाद गांव की महिलाएं आज खुद की मेहनत और हुनर से कारोबार चला रही हैं. आजीविका मिशन के तहत छह साल पहले बने स्वयं सहायता समूह ने अब उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना दिया है. खादी कपड़े, टॉवल और डस्टर जैसी वस्तुएं तैयार कर ये महिलाएं कानपुर से लखनऊ तक अपने उत्पाद बेच रही हैं. 6 लाख रुपए के सरकारी सहयोग से अब उनके कारोबार ने नई ऊंचाई छू ली है, और ये महिलाएं घर की सीमाओं को पार कर अपनी तकदीर खुद बदल रही हैं.ख़बरें फटाफटफर्रुखाबाद. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की महिलाएं अपने घर पर ही आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह बनाकर कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं. इसमें मुख्य रूप से उन्होंने समूह बनाने के 6 साल बाद अपने समूह को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. इसमें करीब 20 महिलाएं कारोबार करके कानपुर से लखनऊ तक अपने सामानों की बिक्री कर रही हैं और कमाई कर रही हैं. शमशाबाद विकासखंड क्षेत्र के गांव की रहने वाली दीदी ने बताया कि आज उन्हें बैंक द्वारा 6 लाख रुपए मिले हैं. इसके बाद उनके समूह की कई महिलाएं अलग-अलग कारोबार कर रही हैं, इनमें से कुछ खादी कपड़े तैयार करती हैं, कुछ डस्टर बनाती हैं, कुछ टॉवल तैयार करती हैं, जो हर किसी को बहुत पसंद आती हैं.
बन गई लखपति दीदी
शमशाबाद गांव में लगातार महिलाएं अब अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं, इसके कारण अब देश की आधी आबादी भी सशक्त होने लगी है. इसके साथ ही उनके मन में “कुछ कर गुजरने” का जज्बा भी पैदा हुआ है, जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है. इस वजह से ये महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं, पावरलूम के जरिए महिलाएं सूट काटने के बाद उन्हें तैयार करती हैं. धागे बनाने के बाद हाथों से कपड़े तैयार किए जाते हैं, इसके बाद कपड़े की कटाई होती है, फिर धुलाई, सफाई और सुखाने के बाद इन्हें टॉवल और डस्टर का रूप दिया जाता है.
हाथों के हुनर की कला
हथकरघा उद्योग के जरिए महिलाओं को रोजगार मिलने लगा है, इसके कारण वे घर के बचे हुए समय में हथकरघा उद्योग को आगे बढ़ाकर अपनी तकदीर बदल रही हैं. पानीपत से कानपुर और फिर फर्रुखाबाद होते हुए शमशाबाद कच्चा माल पहुंचता है. इसके बाद महिलाएं रॉ मैटेरियल को सामान बनाने के लिए जुट जाती हैं. कम समय में ही ऑर्डर तैयार करने के लिए ये महिलाएं लगातार संयुक्त रूप से कार्य करती हैं. 20, 25, 30 रुपए में डस्टर बेचा जाता है. इसके साथ ही खादी से बने कपड़ों के अलग-अलग रेट होते हैं. मुख्य रूप से खादी से बने कपड़ों की खासियत यह होती है कि इनमें गर्माहट कम होती है. इस कारण हर कोई इन्हें खरीद रहा है, हालांकि सर्दियों के दिनों में यह खादी के कपड़े कुछ अलग तरीके से तैयार करती हैं.
कानपुर से लेकर लखनऊ तक है तगड़ी डिमांड
इस समय इन महिलाओं के पास फर्रुखाबाद के साथ-साथ कानपुर और लखनऊ तक के ग्राहकों के ऑर्डर आ रहे हैं. इस कारण ये समय से ही सभी ऑर्डर डिलीवरी कर देती हैं, जिससे उनका कारोबार लगातार तरक्की कर रहा है. एक समय था जब इनके पास रुपए की तंगी रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. आज 6 साल हो चुके हैं जब आजीविका मिशन द्वारा समूह बनाया गया था. इसके बाद इन महिलाओं ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया. सरकार की ओर से करीब 6 लाख रुपए मिले, जिन्हें उन्होंने अपनी तरक्की और कारोबार में लगाकर निरंतर लाभ कमा रही हैं.About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Farrukhabad,Uttar PradeshFirst Published :February 08, 2026, 18:12 ISThomeuttar-pradeshफर्रुखाबाद की महिलाएं हथकरघा, खादी से बनी स्वावलंबी,करोड़ों में कमा रही मुनाफा

