काशी विश्वनाथ होली 2026: काशी में होली का अलग-अलग रंग देखने को मिलता है. इस अद्भुत शहर में बाबा विश्वनाथ भी अपने भक्तों के संग होली खेलते हैं. रंगभरी एकादशी के दिन काशी में यह महाउत्सव होता है. इस दिन काशी की गलियों से लेकर बाबा विश्वनाथ के धाम तक हर तरफ रंग गुलाल से नजर आता है. तो वहीं काशी में होने वाले इस भव्य आयोजन की तैयारी जारी है. इस बार 27 फरवरी को यह महाउत्सव होगा जिसमें लाखों भक्त शामिल होंगे.
इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास से गवना की पालकी निकलती है. इस पालकी में भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान रहते हैं जिनके साथ काशीवासी जमकर होली खेलते हैं. इस दिन काशी की गलियों में करीब 10 क्विंटल से ज्यादा गुलाल उड़ता है. सैकड़ों सालों से यह परम्परा निरंतर चलती चली आ रही है. इस रंगोत्सव के आयोजन के संयोजक संजीव रत्न मिश्रा ने बताया कि इस दौरान महंत आवास, माता गौरा का निवास स्थल बन जाता है. यहां गवनां से पहले की सभी रस्में अदा की जाती हैं.
गवनां से पहले निभाई जाती है ये रस्में
रंगभरी एकादशी के दो दिन पहले से माता गौरा को हल्दी लगाई जाती है. फिर श्रृंगार और अन्य उत्सव होता है. रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ माता गौरा की विदाई के लिए यहां आते हैं और फिर रस्मों की अदायगी के बाद भगवान शिव माता गौरा का गवनां कराकर उन्हें पालकी में ले जाते हैं.
महंत आवास पर तैयारी जारी
फिलहाल, बाबा के इस उत्सव की तैयारी पूर्व महंत आवास पर जोर शोर से जारी है. इसके लिए सभी देवी देवताओं को निमंत्रण भी दिए जा रहे हैं, ताकि इस महाउत्सव में सभी देवी देवता शामिल हो सके. इसके अलावा माता गौरा और भगवान शिव के विशेष वस्त्र भी तैयार किए जा रहे हैं.
बसंत पंचमी से शुरू होती है विवाह की रस्में
बताते चलें कि काशी में बाबा विश्वनाथ के विवाह के उत्सव का आगाज बसंत पंचमी से शुरू हो जाता है. महाशिवरात्रि पर काशी में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का विवाह होता है. इस दौरान बाबा की बारात भी निकाली जाती है. पूरे देश में सिर्फ और सिर्फ काशी में यह उत्सव देखने को मिलता है.

