Uttar Pradesh

HIV एड्स से मम्मी-पापा चले गए, अब मुझे भी मार देंगे… 8 साल के मासूम की सिसकियां सुन कांप जाएगा दिल

एटा: मेरी मां भी चली गई… अब मेरा क्या होगा. मेरा कौन ध्यान रखेगा. परिवारवाले तो मुझे मार देंगे. उनकी निगाह मेरी जमीन पर है. मैं अपनी मां का अकेले ही इधर से उधर ले जाकर इलाज करा रहा था. पहले पापा ने एचआईवी (एड्स) से दम तोड़ दिया और अब मां ने भी. मुझे छोड़कर क्यों चले गए आप लोग… ये अल्फाज 8 साल के बच्चे के हैं. फफक-फफक कर रो रहे बच्चे को देखकर और उसकी बातों को सुनकर पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद लोगों के रौंगटे खड़े हो गए. उन्हें खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि इस नन्हीं सी जान को कैसे सांत्वना दें.

यह है मामला

दरअसल, मामला उत्तर प्रदेश के एटा का है. यहां के जैथरा थाना क्षेत्र के नगला धीरज गांव में रहने वाले एक परिवार पर ऐसी मुसीबत टूटी की घर में अब सिर्फ 8 साल का बेटा सनी और 13 साल की बेटी रह गई. दोनों ही बच्चे बिना माता-पिता कैसे जिंदगी बिताएंगे इसे सोचकर ही घबरा रहे हैं. करीब एक साल पहले एचआईवी (एड्स) से संक्रमित रहे पिता की मौत हो गई. तभी से मां भी बीमार रहने लगी. 8 दिनों से उनका वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था. मगर, 14 जनवरी की रात 10 बजे 45 साल की मां ने भी इसी बीमारी से दम तोड़ दिया.

सुबह-सुबह अकेला चला शव लेकर

सनी सुबह 7 बजे मां के शव को लेकर पोस्टमार्टम कराने अकेला ही जिला मुख्यालय पहुंचा. यहां पंचनामा के लिए गवाहों का इंतजाम तक नहीं हो पा रहा था. सबसे हैरानी की बात रही कि जब महिला की मौत हुई तो उसे कंधा देने के लिए 17 घंटे तक कोई नहीं पहुंचा. अकेला बेटा मां के शव के पास बैठकर बिलखता रहा. कभी वह कफन में लिपटी मां के शव को देखता तो कभी अपने आंसू पोछता. यह देख पुलिसवालों और पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद लोगों का भी दिल भर आया. तभी एक व्यक्ति ने बच्चे को सहारा दिया. कंधे पर हाथ रखकर ढांढस बंधाया.

17 घंटे तक कोई नहीं पहुंचा

पुलिस पंचनामा कराने का इंतजार करती रही. पंचनामा भरने के लिए पांच लोग भी नहीं मिले. हालांकि, मौत की सूचना मिलने के बाद 17 घंटे बाद दोपहर 3 बजे कुछ रिश्तेदार वहां पहुंचे. जिसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू हुई. एक इंस्पेक्टर ने मृत महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई है.

किससे है मासूम को खतरा?

बच्चे ने अपने परिवार (पट्टीदार) के लोगों से ही अपनी जान को खतरा बताया. उसने कहा, परिवार वाले मेरी जमीन हड़पना चाहते हैं. मुझे जान का खतरा है. हमारी मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया. सबकी नजर 5 बीघा प्रॉपर्टी पर है. जब मां बीमार हुई तो मैंने अकेले ही उनका इलाज कराया. फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल, कानपुर के हैलट अस्पताल और दिल्ली तक अपनी मां को इलाज के लिए ले जाकर दिखाया. करीब आठ दिनों से मां की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था. आखिरकार इलाज के दौरान मां ने दम तोड़ दिया.

8 साल के सनी ने बिलखते हुए कहा कि मां के बीमार होने की जानकारी होने के बावजूद किसी भी नाते-रिश्तेदार ने सुध नहीं ली. अब जब मां की मौत की सूचना मिली, तब परिवार के चाचा सहित अन्य लोग पहुंचे. अंतिम संस्कार के लिए राजस्व कर्मी भेजे गए हैं. प्रशासन की निगरानी में अंतिम संस्कार करवाया जाएगा. उसने बताया कि जैथरा थाना प्रभारी रितेश ठाकुर ने उसकी मां के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली.

Source link

You Missed

Iran's military is built to survive, not win a conventional war, analysts say
WorldnewsMar 28, 2026

इरान की सेना को एक पारंपरिक युद्ध जीतने के लिए बनाया नहीं गया है, बल्कि उसे जीवित रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है, विश्लेषक कहते हैं।

अवाम का सच: ईरान की सेना को अमेरिका या इज़राइल के साथ एक सामान्य युद्ध जीतने के लिए…

Professor Calls A Minority Student A "Terrorist", University Suspends Prof.
Top StoriesMar 28, 2026

प्रोफेसर ने अल्पसंख्यक छात्र को “आतंकवादी” कहा, विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया।

बेंगलुरु : एक अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाला छात्र जो बेंगलुरु शहर के पीईएस विश्वविद्यालय में पढ़…

1,000 Buses Checked in AP, Over 200 Penalised for Violations: Ramprasad Reddy
Top StoriesMar 28, 2026

आंध्र प्रदेश में 1000 बसों की जांच की गई, 200 से अधिक को उल्लंघन के लिए दंडित किया गया: रामप्रसाद रेड्डी

अमरावती: आंध्र प्रदेश परिवहन मंत्री एम रामप्रसाद रेड्डी ने शनिवार को कहा कि राज्य में 1,000 से अधिक…

Scroll to Top