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Health Tips : पायरिया से लेकर फोड़े फुंसी तक, रामबाण है बबूल का पेड़, पत्ती-छाल सब संजीवनी – Uttar Pradesh News

Last Updated:January 21, 2026, 23:58 ISTAcacia plant benefits : कभी हमारे आसपास बहुतायत में पाया जाने वाला कीकर (बबूल) का पेड़ तेजी से कम होता जा रहा है. कोई फल या फूल न होने से लोग इसे गैरजरूरी मान लेते हैं, लेकिन इसके फायदे चमत्कारी हैं. अगर आप पाचन, त्वचा, डायबिटीज और दांतों के दर्द से जूझ रहे हैं तो बबलू का पेड़ आपको राहत दिला सकता है. हिंदू धर्म में बबूल का पेड़ पवित्र माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार बबूल के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास माना जाता है, जिस कारण बबूल के पेड़ की पूजा अर्चना भी की जाती है. बबूल का पेड़ सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
बबूल की पत्तियां, गोंद, छाल और फलियों का उपयोग आयुर्वेदिक उपचार में सदियों से किया जाता रहा है. लखीमपुर खीरी के आयुर्वेदाचार्य देवेंद्र भारद्वाज लोकल 18 से बताते हैं कि दांतों और मसूड़े में दर्द के लिए बबूल की फली बहुत ही लाभकारी औषधि है. रोजाना बबूल की फली का दातुन के रूप में प्रयोग करने से दांत मजबूत होते हैं. मसूड़े की सूजन खत्म होती है और खून आना बंद हो जाता है. मुंह की बदबू भी दूर हो जाती है.  कई लोगों को दांतों में पायरिया की समस्या हो जाती है, जिस कारण मुंह से बदबू आने लगती है. हम लोगों से सीधे मुंह बात करने में हिचकने लगते हैं. ऐसे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ये लोग कीकर की दातुन कर सकते हैं. इससे दांत भी साफ हो जाते हैं और मुंह की बदबू से छुटकारा भी मिल जाएगा. अगर आप दस्त से परेशान हैं तो बबलू की फली का चूर्ण इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप सबसे पहले बबूल की फली लें. उसे धूप में अच्छी तरह सुख लें. फिर उसे बारीक पीस लें. और काला नमक मिलकर सेवन करें. इससे आपको गैस और अपच की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा और आपका पाचन तंत्र भी मजबूत होगा. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आर फोड़े फुंसी, खुजली और दूसरे चर्म रोगों का प्रकोप झेल रहे हैं तो बबूल की फली का इस्तेमाल कर सकते हैं. बबूल की फली का लेप बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से 10 से 15 दिन के अंदर राहत मिल जाएगी. प्रतिदिन नया लेप तैयार करके ही लगाएं. बुजुर्गों को सर्दियों में हड्डियों में दर्द की समस्या अक्सर होती है. ऐसे में बबूल के पेड़ से निकलने वाला गोंद का नियमित सेवन करने से राहत मिलती है. सर्दियों में लोग इसका लड्डू बनाकर भी खाते हैं. सर्दियों में शरीर को गर्माहट और ताकत देने के लिए कीकर का गोंद रामबाण है.  आयुर्वेद के अलावा पूजा और व्रत में भी बबूल के पेड़ का विशेष महत्त्व है. हिंदू धर्म में बबूल का पेड़ पवित्र माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार बबूल के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास माना जाता है, जिस कारण बबूल के पेड़ की पूजा अर्चना भी की जाती है. बबूल का पेड़ सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसीलिए गांव में यहां पेड़ बहुत ही पवित्र होता है. हवन में भी बबूल की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है.First Published :January 21, 2026, 23:58 ISThomelifestyleपायरिया से लेकर फोड़े फुंसी तक, रामबाण है बबूल का पेड़, पत्ती-छाल सब संजीवनी

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