Uttar Pradesh

हौसला हो तो ऐसा! प्रधान की सोच ने बदल दी सुल्तानपुर के इस गांव की तस्वीर, पंचायत भवन बना नंबर वन

सुल्तानपुर: कहा जाता है कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो, तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता. सुल्तानपुर जिले के एक शिक्षित ग्राम प्रधान ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. उन्होंने अपने गांव को साफ, सुंदर और विकसित बनाने का सपना देखा और उसे योजनाबद्ध तरीके से पूरा भी किया. आज उनका गांव विकास की मिसाल बन चुका है और यहां बना पंचायत भवन हर किसी का ध्यान खींच रहा है.

पंचायत भवन बना गांव की पहचान
सुल्तानपुर शहर से सटी ग्राम सभा सौरमऊ देहात के ग्राम प्रधान सूर्यमणि मिश्र ने पंचायत भवन को इस तरह विकसित कराया है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं. यह पंचायत भवन किसी आम सरकारी इमारत जैसा नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एक भव्य परिसर नजर आता है. आकर्षक डिजाइन, साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्थाओं ने इसे पूरे क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है.

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मॉडल पंचायत भवनग्राम प्रधान सूर्यमणि मिश्र ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पंचायत भवन में कुल 6 कमरे बनाए गए हैं. इसके साथ एक बड़ा मीटिंग हॉल भी तैयार किया गया है, जहां गांव की बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन होता है. पंचायत भवन का गेट भी भव्य और आकर्षक बनाया गया है, जो पहली नजर में ही लोगों को प्रभावित करता है.

पंचायत भवन के साथ गांव का भी विकाससिर्फ पंचायत भवन ही नहीं, बल्कि प्रधान सूर्यमणि मिश्र ने गांव के अन्य हिस्सों के विकास पर भी बराबर ध्यान दिया है. गांव के प्राथमिक विद्यालय का कायाकल्प कराया गया है, जिससे बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके. इसके अलावा आदर्श गौशाला, जन सुविधा केंद्र जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं. ये सभी काम सौरमऊ गांव को एक मॉडल ग्राम सभा के रूप में स्थापित कर रहे हैं.

अगर सुल्तानपुर जिले की बात करें, तो यहां कुल 979 ग्राम पंचायतें हैं. लेकिन दूबेपुर ब्लाक की ग्राम सभा सौरमऊ का नाम इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है. लोग यह कहने लगे हैं कि सौरमऊ का पंचायत भवन कई शहरों के सरकारी दफ्तरों से भी ज्यादा सुंदर और सुविधाजनक है. यही वजह है कि यह गांव अब दूसरे ग्राम प्रधानों के लिए प्रेरणा बन गया है.

शिक्षा का सही इस्तेमाल बना विकास की ताकतग्राम प्रधान सूर्यमणि मिश्र की खास पहचान उनकी शिक्षा भी है. उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और इसी ज्ञान का उन्होंने गांव के विकास में सही तरीके से इस्तेमाल किया. शिक्षित होने का फायदा उठाते हुए उन्होंने आधुनिक सोच, योजनाबद्ध काम और पारदर्शिता को विकास का आधार बनाया. यही कारण है कि सौरमऊ गांव आज एक आदर्श और मॉडल गांव के रूप में पहचाना जा रहा है.

सौरमऊ गांव की यह विकास गाथा साबित करती है कि अगर नेतृत्व शिक्षित और ईमानदार हो, तो गांवों की सूरत बदली जा सकती है. प्रधान सूर्यमणि मिश्र का यह प्रयास न सिर्फ उनके गांव के लिए, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश के अन्य गांवों के लिए एक सीख और प्रेरणा बनकर उभरा है.

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