Uttar Pradesh

हाथ में काली छतरी, गले में स्टेथोस्कोप… जिंदगी भर 250 रुपये सैलरी, कौन हैं डॉ. तपन?

Agency:एजेंसियांLast Updated:January 14, 2026, 18:54 ISTसाल 1994 से, वे अपना पूरा वेतन अपने मरीजों की मदद के लिए दान करते आ रहे हैं. उनके पास कार नहीं है. उनका कोई निजी क्लिनिक भी नहीं है और उन्होंने कभी शादी भी नहीं की. आज, 80 वर्ष की उम्र में भी, वे हर सुबह एक साधारण काली छतरी लेकर अस्पताल जाते हैं और गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं.सादगी से भरा जीवन जीते हैं डॉक्टर तपन लाहिड़ी वाराणसीः भारत की भूमि पर हर सदी में अपने सुखों का त्याग कर दूसरा का भला करने वाले लोग हमेशा मौजूद रहे हैं और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो अपना हित छोड़कर दूसरों की भलाई करते हैं. ऐसी ही कहानी है पद्म श्री से सम्मानित डॉ. तपन कुमार लाहिड़ी की. डॉक्टर तपन जब अपने कमरे से अस्पताल तक जाते हैं तो उनकी चाल की रफ्तार बहुत ही धीमी होती है. एक हाथ में उनकी काली छतरी होती है और गले में स्टेथोस्कोप और बदन पर डॉक्टर वाला कोट. डॉ.तपन की रोज की यही दिनचर्या है. पूरा बीएचयू उनको जानता है और उनका सम्मान करता है. डॉ. तपन के लिए ज्यादा वेतन और बड़ा पद कोई मायने नहीं रखता है और इसकी बानगी उनकी लाइफस्टाइल में भी झलकती है. अमेरिका में प्रशिक्षण लेने करने के बाद, डॉ. लाहिड़ी भारत लौट आए और मात्र 250 रुपये प्रति माह के वेतन पर बीएचयू में काम करने लगे.

1994 से अपनी सैलरी कर रहे हैं दानसाल 1994 से, वे अपना पूरा वेतन अपने मरीजों की मदद के लिए दान करते आ रहे हैं. उनके पास कार नहीं है. उनका कोई निजी क्लिनिक भी नहीं है और उन्होंने कभी शादी भी नहीं की. आज, 80 वर्ष की उम्र में भी, वे हर सुबह एक साधारण काली छतरी लेकर अस्पताल जाते हैं और गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं. उन्होंने एक बार कहा था, “मैं अपनी अंतिम सांस तक लोगों का इलाज करता रहूंगा.”

डॉ. तपन फेमस कार्डियोथ्रोएसिस हैंऐसे समय में जब हमें अक्सर अधिक पाने के लिए “संघर्ष” करने को कहा जाता है तो डॉ. लाहिड़ी हमें याद दिलाते हैं कि हम समाज में अपना सबसे बड़ा प्रभाव सेवा और सहानुभूति के माध्यम से ही डाल सकते हैं. बता दें कि डॉ. तपन कुमार लाहिड़ी एक फेमस कार्डियोथ्रोएसिस सर्जन हैं. डॉ. तपन को उनके निस्वार्थ सेवा भाव के लिए जाना जाता है.

साल 2016 में डॉ. तपन को मिला था पद्म श्रीसाल 2016 में डॉ.तपन को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. वह 2003 में बीएचयू से रिटायर होने के बाद भी बिना सैलरी के मरीजों की सेवा कर रहे हैं और अपनी पेंशन भी दान कर देते हैं. डॉ. तपन बहुत ही सिंपल लाइफ जीते हैं और ज्यादातर वह पैदल ही अस्पताल जाते हैं.About the AuthorPrashant Raiप्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ेंLocation :Varanasi,Uttar PradeshFirst Published :January 14, 2026, 18:53 ISThomeuttar-pradeshहाथ में छतरी, गले में स्टेथोस्कोप.. जिंदगी भर 250 रुपये सैलरी, कौन हैं डॉ. तपन

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