रिपोर्ट- अभिषेक जायसवालवाराणसी. वाराणसी (Varanasi) में ज्ञानवापी का मुद्दा कोर्ट में है. कोर्ट में कानूनी लड़ाई के बीच बीएचयू (BHU) के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर ने पुराणों में मिले सबूतों के आधार ‘ज्ञानवापी कूप’ को लेकर बड़ा दावा किया है. रिसर्च के बाद प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने ज्ञानवापी (Gyanwapi Case) कूप के स्वरूप को बेहद भव्य बताया है. उन्होंने दावा किया है कि ज्ञानवापी कूप का स्वरूप लगभग 1000 हाथ के व्यास के बराबर था और इसका एक छोर गंगा के तट तक फैला था.इतना ही नहीं, इस विशाल सरोवर के चारों तरफ मंदिर भी स्थापित थे. पूरब में तारकेश्वर, पच्छिम में दंडपाणि, उत्तर में नंदीश्वर और दक्षिण में महाकालेश्वर स्थापित है. स्कंद पुराण के काशी खंड में इसका वर्णन भी है. प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने बताया कि ज्ञानवापी कोई कुआं नहीं है, बल्कि वो सरोवर था. हालांकि समय के साथ उसका आकार छोटा होता गया. उन्होंने दावा किया कि ज्ञानवापी के सरोवर होने का साक्ष्य स्कन्द पुराण और लिंग पुराण में है.जल रूप में विद्यमान हैं भगवान शिवकाशी खण्ड के 33वें अध्याय में ये उल्लेख है कि भगवान शंकर के रुद्रांश द्वारा आदिवेश्वश्वर के जलाभिषेक के लिए त्रिशूल से जमीन पर प्रहार कर इस सरोवर का निर्माण हुआ था. मान्यता है कि ज्ञानवापी के जल में भगवान शिव जल रूप में विद्यमान हैं. जो भी श्रद्धालु इस ज्ञानवापी के जल को अर्पण करता है उसे न सिर्फ ज्ञान की प्राप्ति होती है बल्कि अज्ञानता भी दूर हो जाती है.ज्ञानवापी सरोवर का स्वरूप किया तैयारपांच महीने से अधिक समय के रिसर्च के बाद प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने बाकायदा ज्ञानवापी सरोवर का एक स्वरूप भी तैयार किया है. उनका दावा है कि इस स्वरूप का उल्लेख पुराणों में है जिसे कोई भी देख सकता है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : December 01, 2022, 17:54 IST
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