Uttar Pradesh

गर्मियों में कब करें मक्के की बुवाई, देरी की तो बढ़ जाएगी लागत, उपज कम होगी अलग, कृषि एक्सपर्ट से जानें

मक्के की खेती किसानों के लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में भी किसान बड़े पैमाने पर मक्का उगाने लगे हैं. इत्र नगरी कन्नौज में जहां एक ओर इत्र उद्योग की खास पहचान है, दूसरी तरफ खेती भी यहां की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ रही है. खासतौर पर मक्के की खेती जिले में बड़े पैमाने पर की जाती है. सौरिख, छिबरामऊ, तिर्वा और उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र में किसान व्यापक स्तर पर मक्का की बुवाई करते हैं. मक्का यहां की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है, जिससे पशु आहार उद्योग और बाजार दोनों में अच्छी मांग बनी रहती है. बदलते मौसम के बीच इस बार कृषि विभाग ने किसानों को समय से पहले बुवाई करने की सलाह दी है.

मक्के की बुवाई का सही समय क्या है?
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, मक्के की बुवाई का सही समय फरवरी के अंत से पहले होना चाहिए. यदि किसान देर से बुवाई करेंगे तो फसल के विकास के समय अधिक गर्मी पड़ेगी, जिससे सिंचाई की लागत बढ़ सकती है. अधिक तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम होती है और बार-बार पानी देना पड़ता है. इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ता है. समय रहते बुवाई से लागत कम आएगी.

कृषि विभाग की सलाह
कन्नौज के डिप्टी डायरेक्टर (कृषि) संतोष कुमार कहते हैं कि किसान भाई 4 मार्च से पहले मक्के की बुवाई अवश्य कर लें. समय से बोई गई फसल में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे सिंचाई का खर्च घटता है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होंगी और दाना भराव की प्रक्रिया भी बेहतर होगी. समय से बोई गई फसल में पानी की खपत कम होने से उत्पादन में वृद्धि की संभावना रहती है. किसान भाई प्रमाणित बीज, संतुलित उर्वरक और उचित दूरी पर बुवाई करें. बढ़ते तापमान को देखते हुए समय पर बुवाई ही फायदे का सौदा है.

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