Uttar Pradesh

गर्मियों में बो दें ये फसल, नहीं रहेगी हरे चारे की कमी, बढ़ेगा पशुओं का दुग्ध उत्पादन!

Last Updated:May 13, 2025, 08:37 ISTमुरादाबाद/पीयूष शर्मा: गर्मी में हरे चारे की किल्लत एक बड़ी समस्या होती है. हालांकि किसान कुछ खास तरह का हरा चारा अपने खेतों में बोकर इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं. लोबिया, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों …और पढ़ें ये हरा चारा खाने से पशुओं का स्वास्थ्य तो ठीक रहता ही है साथ ही उनके दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है. इस प्रकार उनका पेट भी भरता है और उन्हें पौष्टिकता भी मिलती है.  पशुपालकों को गर्मी के दिनों में हरे चारे की कमी होने लगती है जिससे उनके दुग्ध उत्पादन में कमी आती है. ऐसे में पशुपालक इस मौसम में कई ऐसी फसले हैं जिनकी की खेती कर हरे चारे की पूर्ति कर सकते हैं. इससे उन्हें दूध का उत्पादन भी अच्छा मिलेगा और उनकी आय भी दोगनी हो सकती है.  लोबिया की खेती हरे चारे का एक अच्छा साधन है. लोबिया एक दलहनी फसल है जो प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इससे पशुओं को पौष्टिक चारा मिलता है. यह तेजी से बढ़ती है. इसलिए इसे हरे चारे की कमी के दौरान भी उगाया जा सकता है. यह एक ऐसी फसल है जिसे आप अपने पशुओं के लिए हरे चारे का साधन भी बना सकते हैं और इस हर चेहरे को बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं. मक्का की खेती भी हरे चारे का एक अच्छा साधन है. मक्के का हरा भाग पशुओं के लिए पौष्टिक होता है. खासकर दुधारू पशुओं के लिए. इसमें ऊर्जा, प्रोटीन और पाचन को बढ़ाने वाले तत्व होते हैं. इस फसल को भी जानवरों के दूध के साथ-साथ बेचकर मुनाफा कमाया जा सकता है. ज्वार की खेती भी किसानों के लिए एक अच्छा साधन हो सकती है. ज्वार का पौधा कठोर होता है. इसलिए यह प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे अधिक तापमान और सूखे को सहन करने की क्षमता रखता है. यह सूखा और कम पानी वाले क्षेत्रों में भी हरे चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.  बाजरा एक ऐसी फसल है जिससे आप दोनों तरह से मुनाफा कमा सकते हैं. एक तो यह आपके पशुओं के लिए हरे चारे का साधन बनेगा तो वहीं इसी हरे चारे को बेचकर भी आप मुनाफा कमा सकते हैं. बाजरे का बीज भी मार्केट में बिक जाता है. यह एक तेजी से बढ़ने वाली और रोग प्रतिरोधक चारा फसल है. जिसे सूखे और आधे सूखे क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है. homeagricultureगर्मियों में बो दें ये फसल, नहीं रहेगी हरे चारे की कमी, बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन!

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