गर्मी का मौसम शुरू होते ही दुधारू पशुओं पर हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की विशेष देखभाल करें.
गर्मी का मौसम शुरू होते ही इंसानों के साथ-साथ दुधारू पशुओं पर भी इसका असर पड़ने लगता है. तेज धूप और बढ़ता तापमान पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकता है. रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के पशु चिकित्सा अधीक्षक डॉ इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि गर्मी के मौसम में पशुओं को सबसे अधिक परेशानी हीट स्ट्रेस की वजह से होती है. तापमान बढ़ने से पशु कम खाना खाते हैं और ज्यादा थकान महसूस करते हैं, जिससे दूध उत्पादन में भी कमी आने लगती है, इसलिए पशुपालकों को पशुओं को ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए.
पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले, पशुओं को दिन में कई बार स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है. गर्मी के मौसम में पशु सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी पीते हैं, इसलिए पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. इसके अलावा पशुओं को दिन में एक या दो बार नहलाने से भी उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और उन्हें गर्मी से राहत मिलती है.
इसके अलावा, पशुओं के चारे पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. गर्मी के मौसम में हरा चारा, खनिज मिश्रण और संतुलित आहार देना चाहिए. इससे पशुओं के शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और दूध उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ता है. साथ ही कि चारे में गुड़, नमक और मिनरल मिक्सचर मिलाकर देना फायदेमंद होता है. इसके साथ ही पशुपालकों को पशुओं को तेज धूप में चराने से बचाना चाहिए. सुबह जल्दी या शाम के समय ही उन्हें चराने के लिए बाहर ले जाना बेहतर होता है. पशुशाला की छत पर फूस या टाट डालकर छाया बनाई जा सकती है, जिससे अंदर का तापमान कम रहता है. अगर पशु ज्यादा हांफने लगे, खाना कम कर दे या सुस्त दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. समय रहते देखभाल और सही प्रबंधन से दुधारू पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है और उनका दूध उत्पादन भी सामान्य बना रहता है.

