Noida Techie Death Case: दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर नोएडा के सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने विकास के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है. यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की उस संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, जहां 80 बचावकर्मी और रेस्क्यू टीम की मौजूदगी में एक 27 साल का नौजवान मोबाइल की टॉर्च जलाकर ज़िंदगी की भीख मांगता रहा, लेकिन वर्दीधारियों ने ‘पानी ठंडा है’ और ‘अंदर सरिया हो सकता है’ कहकर हाथ पीछे खींच लिए. 2022 में गलगोटिया से बीटेक करने वाला होनहार युवराज मेहता आज हमारे बीच नहीं है, पीछे छोड़ गया है तो बस एक पिता की चीखें और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल.
आखिरी वक्त की दास्तां, ‘पापा बचा लो… मैं डूब रहा हूं’हादसे वाली रात शुक्रवार की वह काली रात थी. युवराज की कार सेक्टर-150 के पास एक निर्माणाधीन मॉल के पानी से लबालब भरे बेसमेंट (खाई) में गिर गई. युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने अपनी आंखों के सामने इकलौते बेटे को डूबते देखा. पिता राजकुमार बताते हैं, ‘कोहरे के बीच मैंने देखा कि कार पानी में है और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है. वह सड़क से करीब 60 फीट दूर था. वह लगातार मोबाइल की लाइट जला-बुझा रहा था ताकि हम जान सकें कि वह जिंदा है. मैं चिल्लाया, तो उसकी आवाज आई- पापा बचा लो… हेल्प मी! मैंने डायल-112 को फोन किया, लेकिन मदद के नाम पर सिर्फ तमाशा हुआ.’
‘पानी ठंडा है, हम नहीं उतरेंगे…’घटनास्थल पर रात 12:45 बजे पुलिस और दमकल पहुंची. 1:15 बजे SDRF और फिर NDRF भी आ गई. करीब 80 कर्मचारी वहां मौजूद थे, लेकिन पानी में उतरने का साहस किसी ने नहीं दिखाया. पिता खुद पानी में कूदने को तैयार थे, पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया. वहीं मौजूद एक चश्मदीद मुनेंद्र (डिलीवरी बॉय) ने साहस दिखाया और रस्सी बांधकर पानी में उतरा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. 1:45 बजे युवराज कार समेत पानी में समा गया. डॉक्टरों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, युवराज के फेफड़ों में 200 मिलीलीटर पानी मिला. उसकी मौत दम घुटने और हार्ट फेलियर से हुई. यानी अगर समय रहते उसे बाहर खींच लिया जाता, तो वह आज जीवित होता.
ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने का वो ‘गलत’ फैसला
युवराज 2024 तक गाजियाबाद में रहते थे. मेट्रो कनेक्टिविटी की वजह से उनका गुड़गांव स्थित ऑफिस आना-जाना आसान था. लेकिन नवंबर 2024 में उन्होंने ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने का फैसला लिया. दोस्त पंकज टोकस बताते हैं कि युवराज इस फैसले को लेकर असमंजस में थे. वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी थी, जिसके कारण उन्हें मजबूरन कार से सफर करना पड़ता था. युवराज अपनी बहन के पास यूके (इंग्लैंड) शिफ्ट होने का सपना देख रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.
अथॉरिटी की फाइलें: 10 साल से अटका ‘रेगुलेटर’ और 10 करोड़ का बजटजांच में सामने आया कि यह हादसा कोई इत्तेफाक नहीं था. सेक्टर-150 की जिस साइट पर पानी भरा था, वहां 2015 से सिंचाई विभाग और नोएडा अथॉरिटी के बीच ‘डेथ गेम’ चल रहा था.
2015: हिंडन नदी में पानी मोड़ने के लिए हेड रेगुलेटर का प्रस्ताव बना.
2016: नोएडा अथॉरिटी ने सर्वे के लिए 13.5 लाख रुपये दिए.
2023: आईआईटी दिल्ली से डिजाइन पास हुआ, लेकिन अथॉरिटी ने गेट के प्रकार (मैकेनिकल vs हाइड्रोलिक) पर पेंच फंसा दिया.
नतीजा: 10.5 करोड़ का प्रोजेक्ट कागजों में घूमता रहा और बारिश का पानी जमा होकर ‘मौत का तालाब’ बन गया.
सीईओ हटाए गए, जेई सस्पेंड
इस हृदयविदारक घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है. नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेश एम. को उनके पद से हटा दिया गया है. जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई हैं. मेरठ एडीजी की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जो 5 दिन में रिपोर्ट देगी. साथ ही, उन सभी पुलिसकर्मियों से पूछताछ होगी जो तैराकी जानते हुए भी पानी में नहीं उतरे.
वर्तमान स्थिति: 4 दिन बाद भी तंत्र सुस्तहादसे को 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो कार निकाली जा सकी है और न ही युवराज का मोबाइल मिला है. अथॉरिटी ने खानापूर्ति के लिए कुछ बैरिकेड्स लगा दिए हैं. उधर, पीड़ित परिवार का हाल बुरा है. युवराज की बहन पासपोर्ट रिन्यू न होने के कारण यूके से भारत नहीं आ सकी हैं और वीडियो कॉल पर पिता को ढांढस बंधा रही हैं. सवाल अब भी वही है क्या करोड़ों का रेवेन्यू देने वाले नोएडा के पास 24 लाख की आबादी के लिए एक एयरलिफ्ट संसाधन या साहस वाले गोताखोर नहीं हैं? क्या एक होनहार इंजीनियर की जान की कीमत सिर्फ एक जेई का सस्पेंशन है?

