Uttar Pradesh

गोरखपुर की संगीता ने दिखाया पार्ट-टाइम मॉडल से बड़े सपनों का रास्ता, पढ़िए इनकी पूरी कहानी।

गोरखपुर की संगीता ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार किया और ‘गोरखपुर रत्न’ से सम्मानित हुई. उन्होंने महिलाओं के लिए पार्ट-टाइम रोजगार मॉडल शुरू कर, उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया. आज उनकी फैक्ट्री करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुकी है और उनकी मेहनत ने कई महिलाओं की जिंदगी बदल दी है. गोरखपुर जिले की संगीता की कहानी उन महिलाओं के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं. शुरू से ही संघर्ष भरी जिंदगी जीने वाली संगीता को उनकी मेहनत और सामाजिक योगदान के लिए मुख्यमंत्री के हाथों ‘गोरखपुर रत्न’ का खिताब मिला. यह सम्मान उनके लिए सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी थी. उन्होंने ठान लिया कि अब वह खुद तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता दिखाएंगी.

संगीता ने छोटे स्तर पर डिब्बे (पैकेजिंग बॉक्स) बनाने की फैक्ट्री शुरू की, शुरुआत में पूंजी कम थी, संसाधन सीमित थे, लेकिन इरादा मजबूत था. धीरे-धीरे उनके प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी और आज उनकी फैक्ट्री करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुकी है. स्थानीय बाजार से लेकर नेपाल तक उनका बिजनेस नेटवर्क फैल चुका है. पार्ट टाइम मॉडल, घर और रोजगार दोनों साथ संगीता का सबसे बड़ा बिजनेस आइडिया है ‘पार्ट टाइम वर्क मॉडल’. उनकी फैक्ट्री में कई महिलाएं पार्ट टाइम काम करती हैं. इससे वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आय भी अर्जित कर पाती हैं. यह मॉडल खासतौर पर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद है जो फुल टाइम नौकरी नहीं कर सकती.

संगीता सिर्फ रोजगार ही नहीं देती, बल्कि महिलाओं को बिजनेस सिखाती भी हैं. कुछ को साड़ी की कढ़ाई, कुछ को अगरबत्ती बनाना और कुछ को ऑर्गेनिक दीया तैयार करना सिखाया जाता है. जो महिलाएं घर से छोटा-मोटा काम करती हैं, उन्हें संगीता ऑनलाइन मार्केट तक पहुंचाने में मदद करती हैं. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उनके प्रोडक्ट को बड़ा बाजार मिलता है. महिला उद्यमिता का मजबूत मॉडल संगीता का मॉडल बताता है कि, छोटा स्टार्टअप भी बड़ा रूप ले सकता है, अगर उसमें विजन और सामाजिक सोच हो, उनका फोकस सिर्फ मुनाफा नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है. आज उनकी फैक्ट्री में काम करने वाली कई महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं. संगीता की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच, मेहनत और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कोई भी महिला न सिर्फ खुद सफल हो सकती है, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी बदल सकती है.

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