गोरखपुर शहर की मंडियों और सब्जी बाजारों में इन दिनों चमकदार लाल आलू खूब बिक रहा है. पहली नजर में यह आलू ताजा और आकर्षक लगता है. लेकिन हकीकत बेहद खतरनाक है. जांच में खुलासा हुआ है कि इन आलुओं को प्राकृतिक नहीं बल्कि केमिकल से रंगा गया है.
मिलावट का पर्दाफाश
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जब इस आलू के सैंपल की जांच की तो इसमें आयरन ऑक्साइड और फेरिक ऑक्साइड जैसे हानिकारक केमिकल पाए गए. जिनका इस्तेमाल पेंट, कॉस्मेटिक्स और सिरैमिक्स में होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, आलू के छिलके पर किया गया यह रंग आलू के अंदर तक पहुंच जाता है और बार-बार सेवन करने से किडनी और लीवर फेल तक हो सकता है.
कहां से आ रहा है जहरीला आलू
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, यह आलू कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी और कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से गोरखपुर और आसपास के जिलों में सप्लाई हो रहा है. कोल्ड स्टोरेज से निकालने के बाद इन आलुओं को रासायनिक रंगों से चमकाया जाता है और फिर बाजार में उतार दिया जाता है. यही आलू थोक मंडियों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सप्लाई हो रहा है. साधारण आलू की तुलना में यह आलू 5 से 10 रुपये प्रति किलो महंगा बिक रहा है. दुकानदार इसे “ताजा और बढ़िया” बताकर ग्राहकों को खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. लेकिन असलियत यह है कि यह आलू स्वास्थ्य के लिए जहर है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आलू खाने से पेट की गड़बड़ी हो सकती है, उल्टी और दस्त हो सकते हैं, आंखों में जलन हो सकती है और लंबे समय में किडनी-लीवर की बीमारी हो सकती है.
विभाग की चेतावनी
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने लोगों से अपील कि लाल रंग वाले आलू से बचें. मंडी सचिव और व्यापारियों को भी चेतावनी दी गई है. अगर इस तरह के आलू की बिक्री जारी रही तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. खरीदारी करते समय यदि आलू का रंग असामान्य रूप से चमकदार लगे तो उसे बिल्कुल न खरीदें. यह दिखने में भले ताजा लगे, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है.