Last Updated:January 31, 2026, 17:50 ISTGold Silver Price Public Opinion: शादियों के सीजन के बीच सोना-चांदी खरीदना अब आम आदमी के लिए ‘टेढ़ी खीर’ साबित हो रहा है. गाजियाबाद के सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने के दाम 1.5 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के पार पहुंच गए हैं, वहीं चांदी भी 3 लाख रुपये प्रति किलो के करीब ट्रेंड कर रही है. कीमतों में आए इस बदलाव ने मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है. लोग अब नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गहनों को बदलकर काम चलाने पर मजबूर हैं. इस रिपोर्ट में देखिए गाजियाबाद की जनता का दर्द.गाजियाबाद: शादी-विवाह का सीजन शुरू हो चुका है और बाज़ारों में रौनक बढ़ गई है. लेकिन इस बार की रौनक में एक बड़ी चिंता भी शामिल है. दरअसल, सोना और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रातों की नींद उड़ा दी है. सर्राफा बाज़ार में कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. हालांकि, बीती शुक्रवार को चांदी के दाम में भारी गिरावट (करीब एक लाख रुपये) दर्ज की गई है. लेकिन जनता का कहना है कि ये राहत गरीब आदमी के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. गाजियाबाद के सर्राफा बाज़ार के मुताबिक, 22 कैरेट सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति दस ग्राम को पार कर गया है, वहीं चांदी भी 3 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंची है. लोकल 18 की टीम ने इस मुद्दे पर गाजियाबाद के आम लोगों और जानकारों से बात की आइए जानते हैं उनकी राय.
आम आदमी के लिए सोना अब सिर्फ एक सपना
गाजियाबाद के रहने वाले अंकुश अरोड़ा बड़े भावुक अंदाज़ में कहते हैं कि एक वक्त था जब लोग घर की छोटी-मोटी बचत से भी सोना-चांदी खरीद लिया करते थे. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. अंकुश का मानना है कि सोना खरीदना अब एक आम आदमी की पहुंच से बाहर होकर सिर्फ बड़े उद्योगपतियों का खेल रह गया है. वे कहते हैं, “चांदी में जो मामूली गिरावट आई है, उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि दाम पहले ही बहुत बढ़ चुके हैं. अब तो लोग सिर्फ धार्मिक परंपराओं को निभाने के लिए मजबूरी में थोड़ी-बहुत खरीदारी कर रहे हैं.”
सट्टा बाज़ार ने बिगाड़ा सारा खेलवहीं, सोमवीर सिंह ने कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे कुछ ठोस कारण बताए. उनका मानना है कि भारत में सोने का उत्पादन कम होना और सट्टा बाज़ार का हावी होना कीमतों को आसमान पर ले जा रहा है. सोमवीर का कहना है कि अब लोग नया सोना खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. शादियों में अब पुराने गहनों को ही पॉलिश कराकर या उन्हें तुड़वाकर नए डिज़ाइन बनवाकर काम चलाया जा रहा है. उन्हें उम्मीद है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरते हैं, तभी कीमतों में कोई बड़ी कमी आएगी.
सुरक्षित निवेश बना सोना, निवेशकों की भारी भीड़वहीं, प्रभाकर त्यागी ने बाज़ार के आर्थिक पहलुओं पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि दुनिया भर में चल रही राजनीतिक उठापटक और शेयर बाज़ार के उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को डरा दिया है. ऐसे में बड़े निवेशक अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए गोल्ड मार्केट (सोने के बाज़ार) की तरफ भाग रहे हैं. जब मांग इतनी ज़्यादा होगी, तो दाम तो बढ़ेंगे ही. प्रभाकर का कहना है कि भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व कभी कम नहीं होगा, लेकिन अब लोगों के खरीदने का तरीका बदल गया है. अब लोग दिखावे के बजाय ज़रूरत पर ध्यान दे रहे हैं.
“शगुन के नाम पर अब सिर्फ खानापूर्ति”गाजियाबाद के रहने वाले सुशांत गोयल के मुताबिक, इन बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ ग्राहकों पर ही नहीं, बल्कि व्यापारियों पर भी पड़ा है. उन्होंने बताया कि शादियों में पहले जो भारी गहने दिए जाते थे, उनकी जगह अब शगुन के नाम पर बहुत ही कम मात्रा में सोना-चांदी दिया जा रहा है. सुशांत ने सरकार से गुहार लगाई है कि सोने की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएं.आज आलम यह है कि गिरावट के बाद भी मध्यम वर्गीय परिवार बाज़ार की तरफ देखने से डर रहा है. सबकी नज़रें अब सरकार और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर टिकी हैं, ताकि आने वाले समय में सोना फिर से आम आदमी की तिजोरी तक पहुंच सके.About the AuthorSeema Nathसीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ेंLocation :Ghaziabad,Uttar PradeshFirst Published :January 31, 2026, 17:50 ISThomeuttar-pradesh’सिर्फ अमीरों के लिए रह गया सोना-चांदी’…बढ़ती कीमतों पर फूटा जनता का गुस्सा

