Uttar Pradesh

गन्ने की पत्तियां जलाने से बर्बाद हो रही है मिट्टी की ताकत! ऐसे करें मैनेजमेंट, बढ़ेगी पैदावार

Last Updated:December 13, 2025, 15:07 ISTSugarcane Residue Management: मेरठ सहित पश्चिमी यूपी के गन्ना किसान अब गन्ने की पत्तियों और फसल के अवशेषों को जलाने की बजाय मिट्टी में समाहित करके उनका बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और गन्ने की पैदावार में भी सुधार होता है. एक्सपर्ट से जानिए किस तरह आप इसका सही इस्तेमाल कर सकते है.मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और आसपास के जिलों में गन्ने की कटाई का मौसम चल रहा है. इस दौरान कई किसान गन्ने की पत्तियों और फसल के अवशेषों को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को इस मामले में डरने की जरूरत नहीं है. यदि गन्ने की पत्तियों और फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए और उन्हें मिट्टी में समाहित किया जाए, तो इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार में भी सुधार होता है. यह बात मेरठ मंडल के गन्ना उपायुक्त राजीव राय ने लोकल-18 से बातचीत में कही.

गन्ने की पत्तियों का सही प्रबंधन कैसे करेंगन्ना उपायुक्त राजीव राय ने बताया कि गन्ने की सूखी पत्तियों को जलाने से प्रदूषण बढ़ता है, पर्यावरण को नुकसान होता है और मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी घटती है. इसके बजाय किसानों को गन्ने की कटाई के बाद फसल अवशेषों और पत्तियों को जलाने के बजाय ट्रेश मल्चिंग और एमबी प्लाऊ का इस्तेमाल कर मिट्टी में समाहित करना चाहिए. ऐसा करने से फसल अवशेष मिट्टी में पोषक तत्वों के रूप में वापस लौटते हैं, जिससे खेतों की मिट्टी उपजाऊ बनती है और गन्ने की पैदावार में वृद्धि होती है.

किसानों को किया जा रहा है जागरूक
गन्ना विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चला रहा है. इसके तहत कृषक गोष्ठी और कृषक मेले आयोजित किए जा रहे हैं, जहां पम्फलेट और पेंटिंग के माध्यम से किसानों को अवशेष प्रबंधन के फायदे बताए जा रहे हैं. साथ ही रैटून मैनेजमेंट डिवाइस (RMD), ट्रेश मल्चर और एमवी जैसी फार्म मशीनरी किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान पत्तियों को जलाने के बजाय खेत में ही समाहित करें.
यह भी पढ़ें: लाइसेंस वाली ये खेती बना रही है किसानों को लखपति! मगर रहना पड़ता है दिन-रात चौकन्ना, वरना…

मिट्टी और पैदावार पर पड़ता है प्रभाववर्तमान समय में पश्चिमी यूपी के जिलों में मिट्टी की जांच में पोषक तत्वों की कमी पाई गई है, जिसका सीधा असर किसानों की फसल पर पड़ रहा है. यदि किसान इन नई पद्धतियों को अपनाते हैं, तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और गन्ने की पैदावार में भी सुधार आएगा.

गन्ना विभाग का यह प्रयास किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.About the AuthorSeema Nathसीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ेंLocation :Meerut,Uttar PradeshFirst Published :December 13, 2025, 15:07 ISThomeagricultureगन्ने की पत्तियां जलाने से बर्बाद हो रही है मिट्टी की ताकत! ऐसे करें मैनेजमेंट

Source link

You Missed

WSW Sensitises 200 Students On Combatting Online Harassment
Top StoriesMay 5, 2026

WSW ने 200 छात्रों को ऑनलाइन उत्पीड़न से लड़ने के लिए जागरूक किया

हैदराबाद: महिला सुरक्षा विंग (डब्ल्यूएसडब्ल्यू) पुलिस ने सोमवार को ‘डिजिटल डिग्निटी और सम्मान – ऑनलाइन उत्पीड़न’ नामक एक…

Amsterdam bans all public ads for meat and fossil fuels: report
WorldnewsMay 5, 2026

अम्स्टर्डम ने मांस और जीवाश्म ईंधन के सभी सार्वजनिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया: रिपोर्ट

अम्स्टर्डम ने मांस और जीवाश्म ईंधन के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला राजधानी शहर बन…

Cyberabad Launches Landmark Work-Site School For Migrant Children
Top StoriesMay 5, 2026

साइबराबाद ने प्रवासी बच्चों के लिए ऐतिहासिक कार्यस्थल स्कूल का शुभारंभ किया

साइबराबाद के नरसिंगी में निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए एक अनूठा कार्यस्थल स्कूल का उद्घाटन किया गया।…

Scroll to Top