गेहूं की फसल में बाली निकलने की अवस्था चल रही है, जो उत्पादन तय करने का सबसे महत्त्वपूर्ण समय माना जाता है. इस चरण में यदि सही पोषण, सिंचाई और रोग-कीट नियंत्रण किया जाए तो दाना चमकदार, वजनदार और भरपूर बनता है. इस समय किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी होती हैं ताकि अच्छा उत्पादन ले सकें.
गेहूं में बाली निकलने और दाना बनने की अवस्था पर सिंचाई सबसे अहम होती है. यदि इस समय नमी की कमी हुई तो दाना सिकुड़ सकता है और वजन घट सकता है. इसलिए खेत में हल्की नमी बनाए रखें और जरूरत अनुसार सिंचाई करें. ध्यान रखें कि अधिक पानी देने से जड़ सड़न और रोग बढ़ सकते हैं. सिंचाई सुबह या शाम के समय करें ताकि पानी का नुकसान कम हो और फसल को पूरा लाभ मिले.
इस समय गेहूं में पीला रतुआ और पत्ती झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है. पत्तियों पर पीली धारियां या भूरे धब्बे दिखें तो तुरंत उपचार करें. रोग नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल या टेबुकोनाजोल दवा का छिड़काव करें. समय पर रोग रोकने से पौधा स्वस्थ रहता है और दाना भरने की क्षमता बढ़ती है. देरी करने पर उपज में भारी नुकसान हो सकता है.

