Uttar Pradesh

गाजीपुरकी पारो: नारियल पानी बेचकर बदली जिंदगी, प्रेरणादायक कहानी

गाजीपुर: यूपी के गाजीपुर में महुआ बाग चौराहे पर एक ठेला खड़ा होता है. गर्मियों में प्यासे गले के लिए यह राहत का केंद्र है. यहां ठेले पर नारियल पानी बिकता है. इस नारियल पानी को बेचने वाली एक लड़की है. इस लड़की की मेहनत देखकर हर कोई तारीफ करता है. आज हम इस लड़की के बारे में बताएंगे कि वह कितना मेहनत करती है.

महुआ बाग चौराहे पर ठेला लगाने वाली लड़की का नाम पारो है. वह इस ठेले की मालकिन हैं. पारो ने बताया कि 2017 में जब उन्होंने नारियल पानी का ठेला लगाना शुरू किया तो लोग हंसते थे. लोग कहते थे कि फल, जूस सब चलता है, ये नारियल पानी कौन खरीदेगा. इसके बाद भी वह नारियल पानी बेचती रही.

गाजीपुर में फल, फ्रूट जूस समेत सभी चीजों की दुकानें आपको आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन नारियल पानी जैसा हेल्दी और यूनिक ऑप्शन कोई नहीं था. ऐसे में धीरे-धीरे पारो की दुकान ने रफ्तार पकड़ ली. अब पारो के ठेले से प्रतिदिन 250-300 नारियल आसानी से बिक जाते हैं. बता दें कि पारो का ठेला गाजीपुर में पहला था, जिसने नारियल पानी का बिजनेस शुरू किया. लोग उनके हाथों का नारियल पीने के लिए 5–10 किलोमीटर दूर से आने लगे.

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कंपटीशन में नारियल की बिक्री हुई कम

पारो ने बताया कि 2023-24 में नारियल की बिक्री थोड़ी कम हो गई. अब रोजाना 100 से 200 के बीच ही नारियल बिकते हैं. अब उन्हें देखकर कई लोगों ने बिजनेस शुरू कर दिया है, लेकिन पारो गर्व से कहती हैं कि आज भी लोग सबसे पहले उनके ही ठेले पर आते हैं. वह 8 साल पुराने ठेले की ही सुविधा आज भी लोगों को प्रदान कर रही हैं.

कमाई से जिंदगी में आई रफ्तार

पारो ने बताया कि उनकी कमाई इतनी हुई कि उन्होंने सबसे पहले स्कूटी खरीदी, जिससे आदर्श गांव से महुआ बाग तक आना आसान हो गया. पहले वह पैदल या बस से आती थी, लेकिन नारियल पानी के ठेले से इनकम हुई तो सबसे पहले स्कूटी खरीदी. इतना ही नहीं, पारो बताती हैं कि स्कूटी के अलावा भी कई बड़ी चीजें उन्होंने खरीदी हैं. पर वह नाम नहीं बताना चाहती हैं. ये उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन निजी पहलू है.

बनारस से मंगवाती हैं नारियल

पारो ने बताया कि वह एक नारियल 60 रुपए का बेचती हैं. शुरुआत में लोग 60 रुपए का नारियल खरीदने से हिचकते थे, लेकिन धीरे-धीरे जब हेल्थ को लेकर समझ बढ़ी, तो उनकी बिक्री बढ़ती गई. आज उनका पूरा परिवार माता-पिता, भाई, भाभी और दो बच्चे इसी एक ठेले की आमदनी से पालन-पोषण हो रहा है. पारो ने बताया कि वह नारियल को बनारस से मंगवाती हैं. वह क्वालिटी और स्वाद के साथ कोई समझौता नहीं करती हैं. इसलिए उनकी जमकर बिक्री होती है.

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