Last Updated:January 24, 2026, 22:59 ISTक्या आपकी फसल की कमजोर पैदावार का कारण खाद या बीज नहीं, बल्कि मिट्टी तो नहीं? खेती की इसी अनदेखी सच्चाई पर अब चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर ने फोकस किया है. मिट्टी की सेहत को खेती का आधार मानते हुए विश्वविद्यालय ने किसानों के साथ मिलकर एक ऐसी पहल शुरू की है, जो न सिर्फ पैदावार बढ़ाने बल्कि खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है.ख़बरें फटाफटकानपुर. कानपुर खेती की असली ताकत मिट्टी में छुपी होती है. अगर मिट्टी कमजोर होगी तो फसल भी कमजोर होगी और किसान की मेहनत भी बेकार जाएगी. इसी सच्चाई को जमीन पर उतारने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर ने एक अहम पहल की है. विश्वविद्यालय किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है.
विश्वविद्यालय का साफ मानना है कि खेती को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ नई मशीनें या खाद काफी नहीं हैं, बल्कि मिट्टी की सेहत सबसे जरूरी है. अगर खेत की मिट्टी में जान रहेगी, तभी फसल अच्छी होगी और किसान को सही मुनाफा मिलेगा. इसी सोच के तहत विश्वविद्यालय ने “सॉइल ऑर्गेनिक मैटर बूस्ट कैंपेन” की शुरुआत की है, जिसका मकसद खेतों की मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ाना, रासायनिक निर्भरता कम करना और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना है.
खेती आसान और टिकाऊ सीएसए कानपुर में होने वाला शोध अब सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहेगा. विश्वविद्यालय का फोकस है कि रिसर्च का सीधा फायदा किसानों तक पहुंचे. वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों और कृषि विशेषज्ञों के अनुभव को किसानों की जरूरतों से जोड़कर ऐसी रणनीति बनाई जा रही है, जिससे खेती आसान भी बने और टिकाऊ भी. इसमें मिट्टी की जांच, जैविक खाद, फसल चक्र और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल शामिल है.
मिट्टी की नमी कैसे बनाएकानपुर मंडल के मंडल आयुक्त और चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के विजयंत पांडियन ने बताया कि इस पूरी पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को भारी-भरकम शब्दों या जटिल तरीकों में नहीं उलझाया जाएगा. उन्हें साफ और आसान भाषा में बताया जाएगा कि मिट्टी को कैसे जिंदा रखा जाए, कौन सी फसल कब बोई जाए, खेत में जैविक पदार्थ कैसे बढ़ाया जाए और मिट्टी की नमी कैसे बनाए रखी जाए.
ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़े उत्तर प्रदेश में सीएसए के अंतर्गत चल रहे 15 कृषि विज्ञान केंद्र इस अभियान की रीढ़ होंगे. इन केंद्रों पर किसानों के साथ सीधे संवाद किया जाएगा. गांव-गांव जाकर मिट्टी सुधार से जुड़ी जानकारी दी जाएगी और किसानों की समस्याएं मौके पर ही सुनी जाएंगी. जिला प्रशासन के सहयोग से इन कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इससे जुड़ सकें.About the AuthorMadhuri Chaudharyपिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ेंLocation :Kanpur Nagar,Uttar PradeshFirst Published :January 24, 2026, 22:59 ISThomeuttar-pradeshखेती का भविष्य खतरे में? मिट्टी बचाने के लिए शुरू किया खास अभियान, जानिए

