क्रिकेट जगत में कई ऐसी कहानियां हैं जो युवा खिलाड़ियों के लिए मिसाल साबित होती हैं. गरीबी से लड़कर कुछ क्रिकेटर्स ने अपने माता-पिता के जीवन की काया ही पलट दी. उन्हीं में एक नाम भारत के स्टार रिंकू सिंह का था जो एक जमाने में फूटी कौड़ी को तरस रहे थे. रिंकू के पिता एक गैस एजेंसी में काम करते थे और घर जैसे-तैसे चलता था. रिंकू सिंह जिन्हें पोछा लगाने की जॉब को भी देखने के लिए मजबूर होना पड़ा था. लेकिन आज उनका जीवन बदल गया है. हम आपको ऐसे विदेशी क्रिकेटर की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके सामने रिंकू सिंह की संघर्षभरी स्टोरी भी फीकी लगेगी.
कौन है वो खिलाड़ी?
हम जिस बल्लेबाज की बात कर रहे हैं वो श्रीलंका के युवा पथुम निसांका हैं जो इंटरनेशनल क्रिकेट में साल-दर-साल बेमिसाल होते नजर आए. श्रीलंका के इस ओपनर ने बांग्लादेश के खिलाफ पहले ही टेस्ट मैच में अपने अभी तक के करियर की सबसे बड़ी पारी खेली. पिछले साल उन्होंने वनडे में दोहरा शतक लगाकर अपना डंका बजाया था. इस बार 187 रन की धांसू पारी खेलकर टीम के संकटमोचक साबित हुए.
मां मंदिर के बाहर बेचती थी फूल
पथुम निसांका का करियर संघर्षों से भरा रहा है. उनका परिवार एक समय आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. निसांका की मां मंदिर के बाहर फूल बेचा करती थीं जबकि पिता ग्राउंड ब्वॉय हुआ करते थे. लेकिन आर्थिक तंगी के बावजूद निसांका ने ने क्रिकेट नहीं छोड़ा औल लगातार मेहनत करते रहे. पिता ने अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए खून-पसीना एक किया. उन्होंने कालूतारा स्कूल की तरफ से क्रिकेट खेला. इसके बाद स्कूल क्रिकेट चैंपियनशिप में प्रेसिडेंट कॉलेज के खिलाफ मैच में डबल सेंचुरी ठोकी थी.
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बांग्लादेश के खिलाफ बने संकटमोचक
बांग्लादेश के खिलाफ निसांका अपनी डबल सेंचुरी से चूक गए. एक छोर से मुश्किल में दिख रही श्रीलंका टीम को उन्होंने पटरी पर लाकर खड़ा कर दिया. निसांका ने 256 गेंदों पर 23 चौकों और एक छक्के की मदद से 187 रन ठोके, जिसकी बदौलत श्रीलंका की टीम ने 485 रन स्कोरबोर्ड पर टांगे.
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