Food for diabetes: दक्षिण भारतीय खाने की बात करें तो सबसे पहली चीज जो दिमाग में आती है वह है डोसा. पतले और कुरकुरे क्रेप्स डोसा का एक टुकड़ा आपको स्वर्ग तक पहुंचा देता है. गरमा गरम सांभर और नारियल की चटनी के साथ खाने से यह एक पौष्टिक भोजन बन जाता है. डोसा आमतौर पर पिसी हुई काली दाल और चावल के फर्मेंटेड घोल से बनाया जाता है. हालांकि यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो ऐसे डाइट का पालन करना महत्वपूर्ण है जो आपके ब्लड शुगर लेवल में वृद्धि का कारण न बने. डायबिटीज मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी डाइट से प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट को हटा दें और इसके बजाय अपने खाने में अधिक साबुत अनाज शामिल करें. रागी (ragi dosa) एक ऐसा साबुत अनाज है जो ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने के लिए फायदेमंद माना जाता है.
इसे ध्यान में रखते हुए यहां हम आपके लिए एक रागी दोसा रेसिपी (ragi dosa recipe) लेकर आए हैं जो डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा खाना हो सकता है. यह डोसा दो आटे (रागी के आटे और चावल के आटे) को मिलाकर बनाया जाता है. इस डोसे को आप नाश्ते में बना सकते हैं या दिन में कभी भी खा सकते हैं. इसे सांबर के कटोरे के साथ पेयर करें और आनंद लें. आइए जानते हैं कि रागी दोसा कैसे बनाएं.
रागी डोसा की रेसिपीरागी डोसा बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़ा बाउल लें और उसमें रागी का आटा, चावल का आटा, हरा धनिया, हरी मिर्च, प्याज और नमक डालें. इसे अच्छी तरह मिलाएं और धीरे-धीरे पानी मिलाते हुए गाढ़ा घोल तैयार कर लें. फिर इस मिश्रण को दो घंटे के लिए अलग रख दें. अब तड़का तैयार के लिए एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें राई, जीरा और करी पत्ता डालें. जब ये फूटने लगे तो तड़का बैटर में डालें. अब धीमी आंच पर एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और इसे तेल से चिकना कर लें. गर्म होने पर, एक बड़ा चमचा बैटर डालें और उसे पतला करने के लिए गोलाकार गति का उपयोग करके समान रूप से फैलाएं. इसे एक तरफ से पकने दें. पकाते समय किनारों पर थोड़ा सा तेल डालें. क्रिस्पी होने पर पलट दें और दूसरी तरफ से भी पकाएं. अब आपका रागी डोसा तैयार है और इस गरमा-गरम परोसें.
क्या रागी ब्लड शुगर कम करने में मदद करता है?रागी फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो इसे डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए अत्यधिक फायदेमंद बनाता है. कई अध्ययनों से पता चला है कि यह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में मदद करता है और डायबिटीज से जुड़े ऑक्सीडेटिव तनाव से राहत देता है. यह हमारी क्रेविंग को दूर रखने में भी मदद करता है और पाचन गति को बनाए रखता है.
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