फॉरएवर केमिकल्स का बढ़ता खतरा, पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बन रहा खतरा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी शोधकर्ता शिरजील अहमद ने “फॉरएवर केमिकल्स” यानी पीएफएएस (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. इन केमिकल्स में कार्बन-फ्लोरीन का बेहद मजबूत बंधन होता है, जिससे ये पर्यावरण में लगभग कभी नष्ट नहीं होते. इन केमिकल्स का उपयोग नॉन-स्टिक बर्तनों, फूड पैकेजिंग और अग्निशमन फोम में 1940 के दशक से हो रहा है. समस्या यह है कि ये पानी, मिट्टी और हवा के जरिए पूरी फूड चेन में फैल जाते हैं.
इन केमिकल्स के शरीर में जमा होने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है और कैंसर, लिवर व किडनी रोग का खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन केमिकल्स के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सख्त नियम और सुरक्षित विकल्प विकसित करने की जरूरत है. इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होगी, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा.

