Last Updated:February 09, 2026, 20:46 ISTHigh Profit Vegetable Farming: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक युवा किसान विपुल गोंड ने अपनी सूझबूझ से खेती की लागत को लगभग खत्म कर दिया है. ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे विपुल ने खीरे की पुरानी फसल के लिए बनाए गए मचान का इस्तेमाल करके अब बीन्स की बंपर पैदावार ली है. केवल 1400 रुपये के बीज लगाकर वे हर रोज 40 किलो तक बीन्स की बिक्री कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर महीने मोटा मुनाफा हो रहा है.मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में बड़राव गांव के एक युवा किसान ने साबित कर दिया है कि अगर खेती को सही प्लानिंग के साथ किया जाए, तो यह घाटे का सौदा नहीं है. ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे विपुल गोंड ने अपनी शिक्षा और मेहनत का ऐसा मेल बिठाया है कि आज वे पूरे इलाके के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं. विपुल ने ‘मल्टी क्रॉपिंग’ और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई है, जिससे उनकी खेती की लागत न के बराबर रह गई है और मुनाफा कई गुना बढ़ गया है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान विपुल गोंड ने बताया कि उनकी रुचि शुरू से ही कुछ नया करने में थी. पढ़ाई के साथ-साथ वे अपने खेतों में समय बिताते थे और उन्होंने महसूस किया कि पारंपरिक खेती के बजाय अगर वैज्ञानिक और आधुनिक तरीका अपनाया जाए, तो कमाई बढ़ सकती है. इसी सोच के साथ उन्होंने पूरी तरह से ऑर्गेनिक (जैविक) खेती की शुरुआत की. उन्होंने बीन्स की ‘मोड़ा लेडा’ वैरायटी को चुना, जो न केवल जल्दी फल देना शुरू करती है बल्कि इसका स्वाद भी बाजार में काफी पसंद किया जाता है.
एक ही खर्च में दो फसलों का फायदाविपुल की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका लागत बचाने का तरीका है. उन्होंने अपने 8 बिस्वा के खेत में पहले खीरे की खेती की थी. खीरे की बेल को ऊपर चढ़ाने के लिए उन्होंने बांस और धागों से मचान विधि का ढांचा तैयार किया था. जब बरसात के बाद खीरे की फसल सूख गई, तो उन्होंने उस महंगे मचान को हटाया नहीं. उसी ढांचे पर उन्होंने बीन्स के बीज बो दिए. इससे उन्हें न तो मचान के लिए नए बांस खरीदने पड़े और न ही मजदूरी पर पैसा खर्च करना पड़ा. उनकी लागत सिर्फ 1400 रुपये आई, जो उन्होंने बीज खरीदने में खर्च किए थे.
रोजाना की तुड़ाई और बंपर पैदावारविपुल ने दिसंबर के महीने में बीन्स की बुवाई की थी. अब उनकी मेहनत रंग लाने लगी है और फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है. विपुल बताते हैं कि वे रोजाना 30 से 40 किलो बीन्स की तुड़ाई कर रहे हैं. मोड़ा लेडा वैरायटी की खासियत यह है कि इसमें फल लंबे समय तक आते रहते हैं, जिससे किसान को कई महीनों तक लगातार कमाई होती रहती है. विपुल का मानना है कि वे आने वाले 4 से 5 महीनों तक इसी फसल से अच्छी आमदनी लेते रहेंगे.
बाजार में हाथों-हाथ बिक रही फसलबाजार में अच्छी और ताजी सब्जियों की हमेशा मांग रहती है. विपुल की बीन्स पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई है, इसलिए इसकी चमक और स्वाद आम बीन्स से बेहतर है. मंडी में उनकी फसल 50 रुपये प्रति किलो के थोक भाव पर आसानी से बिक रही है. स्थानीय लोग भी खेत से ही ताजी बीन्स खरीदने पहुंच रहे हैं. विपुल बताते हैं कि दिन-प्रतिदिन इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है, जो उन्हें खेती में और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है.
विपुल का कहना है कि उन्होंने खेती को केवल काम नहीं बल्कि एक बिज़नेस की तरह देखा है. पढ़ाई के साथ-साथ वे दूसरी सब्जियों की भी खेती करते हैं. उनका मानना है कि आज के शिक्षित युवाओं को भी नई तकनीक सीखनी चाहिए. मचान विधि से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सब्जियां जमीन पर नहीं होतीं, जिससे उनमें कीड़े लगने का खतरा कम होता है और उनकी गुणवत्ता बेहतर रहती है.About the AuthorSeema Nathसीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ेंLocation :Gonda,Uttar PradeshFirst Published :February 09, 2026, 20:46 ISThomeagriculture₹1400 की लागत, रोजाना तुड़ाई, मऊ का किसान इस खास मॉडल से कमा रहा तगड़ा मुनाफा

