सनन्दन उपाध्याय/बलिया: कहा जाता है भूखे को अन्न और प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है. इस नियम को शहर में तीन वर्षों से कार्यरत संस्था बखूबी निभा रही हैं. सड़क पर सोने वाले विक्षिप्त, गरीब और असहायो को भरपेट भोजन करवाने का बड़ा बीड़ा इस संस्था ने उठाया है. नगर के युवाओं ने विगत वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में काम कर रही हैं ताकि कोई भी असहाय भूखा रात में न सोए.यह संस्था पूरे जनपद में एक कोशिश मानवता के नाम से प्रसिद्ध है. जरूरतमंद भोजन के समय इसका इंतजार करते हुए नजर आते है. शायद उनको विश्वास होता है कि संस्था हमें भोजन कराने जरुर आएगी. बता दें कि लगभग 3 वर्षों से गरीबों और असहायो को मुफ्त में भोजन कराने में एक कोशिश मानवता के नाम नामक संस्था लगातार काम कर रही है. प्रतिदिन अलग-अलग खाने का आइटम बनाकर यह संस्था जरूरतमंदों को खिलाने का काम करती है.ऐसे हुआ इस संस्था का निर्माणसंस्था के संचालक निखिल कुमार पांडेय ने बताया कि मैं दिल्ली में गया था. वहां एम्स के बाहर सरदार जी लोग वैन लगाकर जरूरतमंदों को खाना खिलाते थे. जैसा कि कहा जाता है कि ठोकर लगने से हर इंसान बदल जाता है. वहां उसे सीन को देखकर मुझे वह ठोकर पैर में नहीं बल्कि दिल में लगी. मुझे लगा कि यह चीज बलिया के लिए बहुत जरूरी है. शायद भोजन न मिलने के कारण सड़क पर सोने वाले, भिक्षा मांगने वाले, गरीब व असहाय लोग बिना खाए भी सो जाते होंगे. तो कोरोना काल में इस संस्था का छोटे रूप में ही निर्माण किया गया.भूखे को भोजन देना ही सबसे बड़ा पुण्यजरूरतमंदों को खाना खिलाने का काम यह संस्था लगातार 3 वर्षों से कर रही है. जिसमें जनपद का रेलवे स्टेशन, जिला अस्पताल और महिला अस्पताल इत्यादि स्थान शामिल है. आज तक संस्था को किसी से कुछ मदद मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ी. खुद अपने आप प्रतिदिन कहीं न कहीं से इसका पूरा व्यवस्था हो जाता है. किसी ने पत्तल दिया तो किसी ने दाल तो किसी ने आटा तो किसी ने चावल दे दिया. जो की कहना गलत नहीं होगा कि ईश्वर की कृपा नही होती तो शायद यह संस्था भी नहीं होती. वर्तमान में कई संपन्न लोग संस्था में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं..FIRST PUBLISHED : November 1, 2023, 21:08 IST
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