कैंसर एक जटिल और गंभीर बीमारी है, जिसका समय पर इलाज ही इसे काबू में लाने का सबसे कारगर तरीका है. लेकिन अक्सर इसका पता देर से चलता है, जिससे इलाज लंबा और मुश्किल हो जाता है. ऐसे में ‘लिक्विड बायोप्सी’इसके लिए एक बेहतरीन टेस्ट साबित हो सकता है.
यह एक साधारण ब्लड टेस्ट की तरह होता है, जिससे न केवल कैंसर की पहचान की जा सकती है, बल्कि यह भी जाना जा सकता है कि कौन-सा इलाज सबसे बेहतर रहेगा. यह क्या है और कैसे काम करता है, यहां आप इस लेख में जान सकते हैं.
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लिक्विड बायोप्सी क्या है?
लिक्विड बायोप्सी एक ऐसा टेस्ट है जिसमें शरीर में कैंसर की मौजूदगी का पता खून या अन्य लिक्विड से लगाया जाता है. यह ट्रेडिशनल बायोप्सी की तरह दर्दनाक नहीं होता, क्योंकि इसमें शरीर के किसी हिस्से को काटने या सुई डालने की जरूरत नहीं होती.
कैसे काम करता है?
जब शरीर में कैंसर मौजूद होता है, तो वह खून में छोटे-छोटे जेनेटिक अंश छोड़ता है. ये ट्यूमर से निकला डीएनए, ट्यूमर से टूटकर निकली कोशिकाएं या सामान्य और कैंसर कोशिकाओं से निकला डीएनए हो सकता है. ऐसे में इनकी जांच करके डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि शरीर में कैंसर है या नहीं, किस प्रकार का है और कौन-सा इलाज बेहतर रहेगा.
क्या कर सकती है यह तकनीक?
यह टेस्ट कुछ विशेष जीन म्यूटेशन (जैसे BRCA1, TP53) की भी पहचान कर सकता है, जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं. कुछ रिसर्च अब इस पर भी काम कर रही हैं कि शरीर की इम्यून सिस्टम यानी वाइट ब्लड सेल्स कैसे कैंसर के प्रति प्रतिक्रिया दे रही हैं. इससे और जल्दी पहचान संभव हो सकती है.
एक कमी भी है
हालांकि यह तकनीक कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन ब्रेन ट्यूमर की पहचान में यह कारगर नहीं होती. इसका कारण है ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’, जो ब्रेन को खून के जरिए पहुंचने वाले हानिकारक तत्वों से बचाता है और कैंसर कोशिकाओं को भी खून में आने से रोकता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)