जौनपुर के एक युवक ने बेरोजगारी से हार मानने के बजाय अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर मिसाल कायम की है. यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि कैसे आत्मविश्वास, सही जानकारी और मेहनत से कोई भी युवा अपने जीवन को बदल सकता है और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है.
जौनपुर जिले के एक युवक ने हाल के समय में नौकरी न मिलने से परेशान होकर हार मानने की बजाय खेती-बाड़ी की ओर रुख किया. उसने अपने खाली पड़े खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और आज वही खेती उसकी जिंदगी बदल चुकी है और वह हर महीने लाखों रुपये की कमाई का जरिया बन गई है.
बेरोजगारी से उपजा आत्मविश्वास
युवक ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने कई जगह नौकरी के लिए प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. परिवार की जिम्मेदारी और भविष्य की चिंता उसे लगातार परेशान कर रही थी. तभी उसने ठान लिया कि अगर नौकरी नहीं मिल रही, तो वह खुद रोजगार खड़ा करेगा. इंटरनेट और कृषि विभाग से जानकारी जुटाकर उसने ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में जाना. ड्रैगन फ्रूट एक ऐसा फल है जिसमें कम पानी, कम देखभाल और अधिक मुनाफा मिलता है.
ड्रैगन फ्रूट को ‘सुपरफ्रूट’ कहा जाता है. इसकी बाजार में काफी मांग है और इसके अच्छे दाम मिलते हैं. यह फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. सामान्य फलों की तुलना में इसकी शेल्फ लाइफ भी अधिक होती है. सबसे बड़ी बात यह कि इसे बहुत कम पानी और देखभाल की आवश्यकता होती है. इन खूबियों को जानकर युवक ने इसी की खेती करने का निर्णय लिया.
शुरुआत में मिली चुनौती, फिर मिली सफलता
शुरुआत आसान नहीं थी. परिवार वालों ने भी पहले संदेह जताया कि नये-नये फल की खेती कौन खरीदेगा? लेकिन युवक ने हार नहीं मानी. उसने बैंक से ऋण (लोन) लिया और सरकार की योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाया. ड्रैगन फ्रूट की बेलें लगाने के लिए खेत में सीमेंट के खंभे खड़े किए गए. करीब एक साल की मेहनत के बाद पौधों में फूल और फल आने शुरू हो गए.
अब उसके खेत में ड्रैगन फ्रूट की बंपर पैदावार हो रही है. फल की कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक जाती है और एक पौधा साल में कई बार फल देता है. अब वह मंडियों और सीधे ग्राहकों को क्विंटल भर-भरकर ड्रैगन फ्रूट बेच रहा है. उसकी महीने की आमदनी अब लाखों रुपये में पहुंच चुकी है.
सराहना और सरकारी सहयोग
इस सफलता की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है. जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने न केवल इस प्रयास की तारीफ की, बल्कि यह भी बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जा रही है. उनका मानना है कि ऐसे नवाचार बेरोजगारी को खत्म करने में मदद कर सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकते हैं।
बेरोजगारों के लिए सबक, युवाओं के लिए प्रेरणा
जौनपुर के इस युवक की कहानी उन सभी युवाओं के लिए संदेश है जो बेरोजगारी से हार मान लेते हैं. उसने दिखा दिया कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा में उठाया गया एक कदम पूरी ज़िंदगी को बदल सकता है. आज वह न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर है, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने की योजना बना रहा है. उसके खेत में अब दूसरे किसान आकर ड्रैगन फ्रूट की खेती सीख रहे हैं.