उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के खिंदौड़ा गांव की 14 साल की साक्षी 30 मई से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है. तीन महीने बीत जाने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं लग सका है. परिजनों ने पुलिस-प्रशासन से लेकर अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की, लेकिन अभी तक बेटी की तलाश जारी है. लगातार इंतजार और मायूसी ने साक्षी की मां का मानसिक संतुलन भी बिगाड़ दिया है.
साक्षी 30 मई को घर से दुकान पर सामान लेने निकली थी और तभी से लापता है. परिवार और ग्रामीणों ने उसे काफी तलाशा लेकिन पता नहीं चला. थक-हारकर परिवार ने पुलिस को शिकायत दी, लेकिन तीन महीने गुजरने के बाद भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया.
साक्षी के पिता अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने ऐसा कोई अधिकारी नहीं छोड़ा जिसके पास अपनी बेटी की बरामदगी की गुहार न लगाई हो. आश्वासन तो मिला लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि पांच दिन तक ग्रामीणों के साथ धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक करनी पड़ी. तब अधिकारियों ने सात दिन का समय मांगा और जल्द बरामदगी का भरोसा दिलाया. मगर तीन महीने बाद भी नतीजा शून्य है.
इसी बीच, बेटी की जुदाई का गहरा असर उसकी मां पिंकी पर पड़ा. लगातार रोने और चिंता के कारण उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. मां हर किसी से बेटी को घर लाने की फरियाद करती हैं, लेकिन उनकी आंखें अभी भी साक्षी की राह तक रही हैं. साक्षी का छोटा भाई शिवांश भी रोज बहन को याद करता है और परिवार व पड़ोसियों से उसके बारे में पूछता है.
एडिशनल एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस की तीन टीमें साक्षी की तलाश में लगी हैं. कई अहम तथ्य सामने आए हैं और पुलिस पूरी कोशिश कर रही है कि नाबालिग को जल्द बरामद कर लिया जाए.