Title : धौलाधार पर्वत ने ओढ़ी बर्फ की चादर Synopsis : करीब साढ़े तीन माह का ड्राईस्पेल भारी बर्फबारी व बारिश के साथ ही खत्म हो गया। वहीं बारिश के साथ हुई बर्फबारी से धौलाधार ने बर्फ की चादर ओढ़ ली है। Story Line : SHABD,Shimla, January 24, धौलाधार पर्वत ने ओढ़ी बर्फ की चादर जनवरी24, कांगड़ा(हिमाचल प्रदेश): करीब साढ़े तीन माह का ड्राईस्पेल भारी बर्फबारी व बारिश के साथ ही खत्म हो गया। वहीं बारिश के साथ हुई बर्फबारी से धौलाधार ने बर्फ की चादर ओढ़ ली है। पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज, धर्मकोट, त्रियूंड सहित नड्डी, ठठारना के निचले क्षेत्र में भी बर्फबारी से पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। जबकि सुबह तक धर्मशाला के मैक्लोडगंज, भागसूनाग, नड्डी, खनियारा के खड़ौता, थातरी, योल तक बर्फ़बारी हुई है। शुक्रवार शाम को हुए ताजा हिमपात के बाद भारी संख्या में बाहरी राज्यों से पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेने के लिए धर्मशाला पहुंच रहे हैं। बर्फबारी के बाद पर्यटन उद्यमियों को आगामी दिनों में पर्यटन कारोबार के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद बढ़ गई है। बारिश ने किसानों व बागवानों को राहत प्रदान की है। कांगड़ा जिले की धौलाधार पर्वत श्रेणी की ऊंची पहाड़ियों पर हिमपात हो रहा है, जबकि रूक रूक कर बारिश का क्रम जारी रहा। बागवानी तथा किसानों के लिए ये बारिश संजीवनी साबित हुई है। वहीं बारिश से लोगों को सूखी ठंड की बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। हालांकि इस मौसम में ठंड से बचने में ही सुरक्षा है। जिले में वीरवार रात शुरू हुई बारिश के साथ तेज तूफान चला। इसके चलते हल्की बारिश होती रही। सुबह धौलाधार की पहाडिय़ां चांदी के श्रृंगार के साथ नजर आईं। निचले क्षेत्रों में बारिश के साथ हवाओं के कारण ठंड बढ़ गई है। लंबे समय बाद हुई इस बारिश से लोगों को सूखी ठंड से हो रही बीमारियों से भी राहत मिलेगी। बागवानी क्षेत्र को इस बारिश तथा हिमपात से संजीवनी मिली है। पलम, आड़ू, सेब, नाशपाती, कीवी तथा जापानी फल की पौध इन दिनों में अब बागवान रोप पाएंगे। एक से दो साल के पौधों के सूख जाने की चिंता से भी अब बागवानों को राहत मिली है। बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो बारिश के साथ ही फलों जैसे आड़ू, सेब, पलम, नाशपाति, कीवी तथा जापानी फल आदि के पौधे लगाए जा सकेंगे। प्रदेश के सबसे बड़े कृषक जिले कांगड़ा के कई हैक्टेयर असिंचित क्षेत्र में फसलों के नमी की कमी से पीली पड़ने की समस्या में बारिश राहत बन बरसी है। मौसम का क्रम ऐसा रहा तो इससे कृषि क्षेत्र को लंबे सूखे से नुकसान से राहत मिल पाएगी। बताते चलें कि असिंचित भूमि होने के कारण कई जगह बारिश न होने के कारण खेती नहीं हो पाई। इस समय में बारिश दम तोड़ती खेती के लिए संजीवनी बन गई है। लंबे समय से बारिश न होने के चलते जहां पेयजल योजनाएं प्रभावित होना शुरू हो गई थी, वहीं फसलों में भी पीलापन आना शुरू हो गया था।
इतिहास रचने जा रहा मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, पहली बार होंगी परीक्षाएं, पहला पेपर 27 जनवरी को
Mirzapur latest news : मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाएं…
