Uttar Pradesh

Chitrakoot News : लुप्त होती बांसुरी की परंपरा को जीवित कर रहे हैं चित्रकूट के संत मोहन दास

Last Updated:January 05, 2026, 13:14 ISTChitrakoot News : चित्रकूट में संत मोहन दास बांसुरी की लुप्त होती परंपरा को फिर से जीवित कर रहे हैं. अपनी मधुर धुन से वे न केवल श्रद्धालुओं के मन को भक्ति और शांति से भर देते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को निशुल्क बांसुरी सिखाकर इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं.चित्रकूट : एक दौर था जब गांव की गलियों, मंदिरों के प्रांगणों और मेलों में बांसुरी की मधुर धुन गूंजती थी. यह धुन सिर्फ कानों को सुकून नहीं देती थी, बल्कि मन को भी शांति से भर देती थी. लेकिन बदलते समय, आधुनिक संगीत और तेज़ भागदौड़ भरी जिंदगी में यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे हाशिये पर चली गई. आज बांसुरी बजाने वाले कलाकार गिने-चुने ही बचे हैं. इसी लुप्त होती परंपरा को जीवित करने का बीड़ा मथुरा से चलकर चित्रकूट पहुंचे एक संत ने उठाया है, जिन्हें अब स्थानीय लोग बांसुरी वाले बाबा के नाम से जानने लगे हैं.

चित्रकूट के प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर यह संत अपनी बांसुरी से भगवान कामतानाथ को मधुर धुन सुनाते हैं. उनकी बांसुरी की तान वातावरण में घुलती है और वहां से गुजरने वाले श्रद्धालु अनायास ही रुक जाते हैं. कुछ पल के लिए उनकी थकान और चिंताएं मानो धुन में खो जाती हैं. संत मोहन दास मथुरा से आए हैं और करीब तीन महीनों से रोजाना परिक्रमा मार्ग से लेकर कामतानाथ मंदिर तक बांसुरी बजा रहे हैं.

फ्री में सिखाते हैं बांसुरीसंत मोहन दास मानते हैं कि बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और इसकी धुन भक्ति का सबसे सुंदर माध्यम है. उन्होंने यह परंपरा आगे बढ़ाने के लिए लोगों को निशुल्क बांसुरी सिखाने का काम भी शुरू किया है. वे किसी भी तरह का पैसा नहीं लेते और चाहते हैं कि नई पीढ़ी इस कला को सीखे और आगे बढ़ाए.

क्या है बाबा का उद्देश्य?मोहन दास बताते हैं कि उनका उद्देश्य प्रसिद्धि या धन कमाना नहीं है. उनका मानना है कि अगर आज उन्होंने यह जिम्मेदारी नहीं उठाई, तो आने वाले समय में बांसुरी केवल किताबों और तस्वीरों तक सिमटकर रह जाएगी. उनकी कामना है कि वे जीवित रहने तक इस परंपरा को सिखाते रहें और उनके बाद भी बांसुरी की मधुर आवाज बंद न हो. चित्रकूट में बांसुरी वाले बाबा का यह अनोखा जागरूकता अभियान अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है.About the Authormritunjay baghelमीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ेंLocation :Chitrakoot,Uttar PradeshFirst Published :January 05, 2026, 13:14 ISThomeuttar-pradeshलुप्त होती बांसुरी की परंपरा को जीवित कर रहे हैं चित्रकूट के संत मोहन दास

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