Last Updated:January 08, 2026, 22:59 ISTTips preventing diseases chili : अगर किसान हरी मिर्च की खेती में समय रहते रोगों की पहचान कर सही उपाय अपनाएं, तो यह फसल उन्हें निराश नहीं बल्कि अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. कम समय में तैयार होने वाली हरी मिर्च बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान में बदल सकती है. बलिया के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इसके रोग प्रबंधन को लेकर सतर्क किया है.बलिया: हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए तेजी से आमदनी देने वाली फसलों में शामिल होती जा रही है. यह फसल कम अवधि में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है. सही देखभाल और रोग नियंत्रण के साथ किसान इससे अच्छा लाभ कमा सकते हैं. हालांकि रोग लगने की स्थिति में पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है.
रोग प्रबंधन सबसे अहम कड़ीश्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, हरी मिर्च की खेती में रोग प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यदि शुरुआती स्तर पर रोगों को पहचान लिया जाए, तो फसल को बचाया जा सकता है.
जड़ सड़न रोग से रहें सतर्कजड़ सड़न रोग हरी मिर्च की खेती में आम लेकिन खतरनाक समस्या है. यह रोग तब दिखाई देता है जब पौधा लगभग एक महीने का हो जाता है. अचानक पौधे मुरझाकर गिरने लगते हैं और जड़ें सड़ जाती हैं. इससे बचाव के लिए कार्बेंडाजिम जैसे फफूंदनाशी का सही मात्रा में प्रयोग करना लाभदायक होता है. जल निकास की उचित व्यवस्था भी जरूरी है.
उकठा रोग से पूरी फसल को खतराहरी मिर्च की खेती का सबसे बड़ा दुश्मन उकठा रोग माना जाता है. यह रोग बैक्टीरिया और फफूंद दोनों के कारण फैल सकता है और पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. इससे बचाव के लिए बीज या पौध को रोपाई से पहले उपचारित करना बेहद जरूरी है. शुरुआती अवस्था में नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
पर्ण कुंजन या गुरचहवा रोग की पहचानएक और खतरनाक रोग पर्ण कुंजन या गुरचहवा रोग है. इस बीमारी में पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. यह रोग फफूंद और विषाणु दोनों के कारण हो सकता है. यदि पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई दें, तो फफूंदनाशी का छिड़काव करें. अन्य परिस्थितियों में उपयुक्त कीटनाशी दवाओं का प्रयोग लाभकारी रहता है.
सहफसल से भी मिल सकता है बचावप्रो. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि हरी मिर्च की खेती के साथ धनिया और मेथी की सहफसल लगाना एक देसी और प्रभावी उपाय है. ये फसलें खेत में कई प्रकार के विषाणु और जीवाणुओं को नियंत्रित करने की क्षमता रखती हैं. इससे रोगों का प्रकोप कम होता है और फसल सुरक्षित रहती है.
जागरूकता से बढ़ेगी आमदनीकृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हरी मिर्च की खेती में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. समय पर निरीक्षण, सही दवाओं का संतुलित प्रयोग और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान न सिर्फ फसल को रोगों से बचा सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी हासिल कर सकते हैं.Location :Ballia,Uttar PradeshFirst Published :January 08, 2026, 22:59 ISThomeuttar-pradeshहरी मिर्च की खेती में रोगों से बचाव बना सकता है किसानों को मालामाल

