खरखौदा की जासोरी गांव में इसी चरखे से धागा बनाती हैं महिलाआधुनिक दौर में चाहे युवा कितने ही बदल गए हो. लेकिन मेरठ खरखौदा ब्लॉक के दो गांव में आज भी चरखे के माध्यम से खादी को निरंतर जारी रख रही है.मेरठः-डिजिटल दौर में जहां आज हर कोई आधुनिक मशीनों के माध्यम से ही कार्य करना चाहता है. उसी दौर में पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) से 25 किलोमीटर दूर खरखौदा (Kharkhoda) ब्लॉक के कुछ गांव ऐसे भी हैं. जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए चरखे को प्राथमिकता दी जाती है. जी हां गांव में आज भी चरखे के माध्यम से महिलाएं खादी से संबंधित वस्त्रों के लिए रूई से धागा बनाते हुए मिल जाएंगी.महंगा जरूर मगर सबसे बेहतर होता है है खादी चरखे का उपयोग करते हुए खादी के लिए धागा बनाने वाली महिलाओं की माने तो भले ही आधुनिक मशीनों के माध्यम से जल्दी कपड़े बनकर तैयार हो जाते हैं. उनका मूल्य भी सस्ता होता है. लेकिन चरखे के बनाए हुए धागे सालों साल तक चलते हैं.पैसे में हो वृद्धि सभी को मिले राहतचरखे से धागा बनाने वाली महिलाओं की मानें तो सुबह से शाम तक सिर्फ 50 रूपये के धागे को ही बना पाती हैं. ऐसे में सरकार अगर खादी की तरफ विशेष रुप से ध्यान दे.तो इससे जुड़े लोगोंं की संख्या में भी इजाफा हो सकता है.गौरतलब है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश का मेरठ गांधी आश्रम उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गांधी आश्रम था. लेकिन धीरे-धीरे क्षेत्रों के विभाजन होने के बाद अब यह सीमित हो गया है. फिर भी ग्रामोद्योग काफी संख्या में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में खादी से संबंधित रोजगार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि अब बदलते दौर में लोगों का रुझान उस तरह नही दिखाई दे रहा. जिस प्रकार दिखाई देना चाहिए था.पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.हमें Facebook, Twitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.
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